स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को बड़ा झटका: जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना ठोस आधार के क्लेम खारिज करने पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला, ब्याज सहित हर्जाना देने का निर्देश
कटनी: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने सेवा में कमी (Deficiency in Service) के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में उपभोक्ता के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने बिना किसी पुख्ता और ठोस साक्ष्य के बीमा क्लेम खारिज करने पर स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आड़े हाथों लेते हुए परिवादी को ब्याज सहित संपूर्ण राशि भुगतान करने का आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला?
कटनी शहर के राहुल बाग निवासी प्रतिष्ठित व्यवसायी श्री संजय अग्रवाल ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से वर्ष 2018-19 की अवधि के लिए 7,50,000/- रुपये (सात लाख पचास हजार रुपये) का हेल्थ इंश्योरेंस कवर क्रय किया था, जिसके एवज में उनके द्वारा 41,242/- रुपये का प्रीमियम अदा किया गया था।
पॉलिसी अवधि के दौरान श्री संजय अग्रवाल ने नागपुर के प्रसिद्ध ‘सराक्षी नेत्रालय’ में अपनी दाहिनी आंख का इलाज कराया था, जिस पर कुल 70,000/- रुपये खर्च हुए थे। इलाज के उपरांत जब श्री अग्रवाल ने नियमानुसार बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया, तो स्टार हेल्थ इंश्योरेंस ने पुरानी बीमारियों (Pre-existing diseases) का निराधार बहाना बनाते हुए उनका दावा पूरी तरह से खारिज कर दिया।
न्यायालय का परीक्षण एवं तर्क
बीमा कंपनी के इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से क्षुब्ध होकर परिवादी श्री संजय अग्रवाल ने अपने अधिवक्ता श्री शाहनवाज खान (एडवोकेट) के माध्यम से माननीय जिला उपभोक्ता आयोग, कटनी के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के वाद, प्रतिवाद, दस्तावेजों, तर्कों और न्याय-दृष्टांतों का बारीकी से परिसीमन किया। माननीय जिला आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी की ओर से ऐसा कोई भी साक्ष्य पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि पॉलिसी लेते समय बीमाधारी ने अपनी किसी पूर्व बीमारी को छिपाया था।
मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर, जिला उपभोक्ता आयोग के विद्वान अध्यक्ष श्री सनत कुमार कश्यप तथा विद्वान सदस्य श्रीमती रेखा पांडे की खंडपीठ ने परिवादी के पक्ष में निर्णय देते हुए स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को निम्नलिखित आदेशित किया है:
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इलाज की राशि: आदेश दिनांक 27/07/2026 से 45 दिवस के भीतर इलाज में व्यय हुई राशि 69,804/- रुपये परिवादी को वापस दी जाए।
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ब्याज: उक्त राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि (27/11/2020) से लेकर भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा किया जाएगा।
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सेवा में कमी हर्जाना: मानसिक कष्ट एवं सेवा में कमी के लिए 5,000/- रुपये का भुगतान किया जाए।
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वाद व्यय: मुकदमे के खर्च के रूप में 2,000/- रुपये अलग से अदा किए जाएं।
इस महत्वपूर्ण निर्णय से बीमा क्षेत्र में बिना पर्याप्त आधार के ग्राहकों के क्लेम खारिज करने वाली कंपनियों को एक कड़ा संदेश मिला है।
