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यूरोप ट्रिप कैंसिल होने पर पैसे दबाना ‘मेक माय ट्रिप’ को पड़ा भारी-उपभोक्ता फोरम का बड़ा आदेश- कस्टमर को लौटाएं ₹6 लाख और दें हर्जाना

यूरोप ट्रिप कैंसिल होने पर पैसे दबाना 'मेक माय ट्रिप' को पड़ा भारी-उपभोक्ता फोरम का बड़ा आदेश- कस्टमर को लौटाएं ₹6 लाख और दें हर्जाना

यूरोप ट्रिप कैंसिल होने पर पैसे दबाना ‘मेक माय ट्रिप’ को पड़ा भारी-उपभोक्ता फोरम का बड़ा आदेश- कस्टमर को लौटाएं ₹6 लाख और दें हर्जाना

ग्वालियर: अगर आप भी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनियों के जरिए देश-विदेश घूमने के लिए महंगे टूर पैकेज बुक करते हैं, तो ग्वालियर उपभोक्ता फोरम का यह फैसला आपके लिए बेहद जरूरी और राहत देने वाला है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नामी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी ‘मेक माय ट्रिप’ को सेवा में कमी का दोषी पाया है।

आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को 45 दिन के भीतर 6 लाख रुपये वापस करे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के एवज में 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपये मुकदमा खर्च (वाद व्यय) भी देने के निर्देश दिए हैं।

₹10.27 लाख का था यूरोप पैकेज; कंपनी ने कैश देने के बजाय थमा दिया वाउचर

यह पूरा मामला ग्वालियर निवासी विकास शर्मा से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने अपनी ड्रीम ट्रिप के लिए लाखों रुपये खर्च किए थे:

  • जनवरी 2025 की बुकिंग: परिवादी विकास शर्मा ने जनवरी 2025 में यूरोप यात्रा के लिए मेक माय ट्रिप से लगभग 10.27 लाख रुपये का एक भारी-भरकम टूर पैकेज बुक कराया था।

  • कंपनी ने बदला शेड्यूल: बुकिंग के बाद कंपनी ने अचानक यात्रा कार्यक्रम (शेड्यूल) में बदलाव की जानकारी दी और नई तारीखों का प्रस्ताव रखा। इससे असहमत होकर विकास शर्मा ने अपनी यात्रा रद्द करने और पूरी रकम वापस (Refund) करने की मांग की।

  • कस्टमर के साथ चालाकी: कंपनी ने विकास को नकद या बैंक खाते में पैसे लौटाने के बजाय केवल 3.57 लाख रुपये का गिफ्ट वाउचर देने की पेशकश की, जिसे विकास शर्मा ने ठुकरा दिया और न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

 कंपनी की दलीलें खारिज, फोरम ने कहा- ‘कैश रिफंड न करना सेवा में घोर कमी’

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मेक माय ट्रिप कंपनी ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए कई तर्क दिए, लेकिन उपभोक्ता फोरम के सामने उनकी एक न चली:

  • कंपनी का तर्क: कंपनी का कहना था कि एयर टिकट, होटल बुकिंग और अन्य तैयारियों पर राशि पहले ही खर्च हो चुकी थी। साथ ही वीजा स्वीकृत नहीं होने के कारण यह यात्रा निरस्त हुई, इसलिए पूरा रिफंड नहीं दिया जा सकता।यूरोप ट्रिप कैंसिल होने पर पैसे दबाना ‘मेक माय ट्रिप’ को पड़ा भारी-उपभोक्ता फोरम का बड़ा आदेश- कस्टमर को लौटाएं ₹6 लाख और दें हर्जाना

  • फोरम का कड़ा रुख: आयोग ने जब कंपनी से खर्च का पाई-पाई का हिसाब और बिल मांगे, तो कंपनी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उपभोक्ता की राशि असल में कहां और कितनी खर्च हुई। आयोग ने साफ कहा कि रिफंड के बदले गिफ्ट वाउचर थोपना और नकद वापसी न करना ‘सेवा में कमी’ (Deficiency in Service) की श्रेणी में आता है।

45 दिन की डेडलाइन; चूके तो देना होगा 6% का ब्याज

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि वीजा न मिलने और शुरुआती तैयारियों में कंपनी का कुछ खर्च जरूर हुआ है, इसलिए आंशिक राहत देते हुए 6 लाख रुपये रिफंड करने का आदेश सुनाया।

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