अब क्लास में बैठकर ही सांची स्तूप और मांडू की सैर करेंगे बच्चे, पुरातत्व विभाग की अनोखी पहल

अब क्लास में बैठकर ही सांची स्तूप और मांडू की सैर करेंगे बच्चे, पुरातत्व विभाग की अनोखी पहल

भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के स्कूली बच्चों के लिए इतिहास अब केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहेगा। वे अब क्लास में बैठे-बैठे ही वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के जरिए प्रदेश की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों की सैर कर सकेंगे। पुरातत्व एवं अभिलेखागार विभाग ने ‘सेवा पखवाड़े’ के तहत यह अभिनव पहल शुरू की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू होकर यह विशेष अभियान दशहरा तक चलेगा। इस दौरान भोपाल के लगभग 25 से 30 सरकारी स्कूलों को इस अनूठी पहल से जोड़ा जाएगा।

VR हेडसेट से दिखेगा ‘हाइपर-रियलिस्टिक’ इतिहास

विभागीय टीम हर दिन एक सरकारी स्कूल में पहुंचेगी और स्टूडेंट्स को VR हेडसेट पहनाकर 10 मिनट का एक विशेष वीडियो दिखाएगी। इस वीडियो में ऐतिहासिक स्थलों को ‘हापर-रियलिस्टिक’ दृश्यों के साथ पेश किया जाएगा, जिससे बच्चों को बिल्कुल ऐसा अनुभव होगा जैसे वे वास्तव में उस जगह मौजूद हों। वे स्मारकों, उनकी वास्तुकला और आसपास के परिवेश को अलग-अलग कोणों (angles) से देख सकेंगे और उनके इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे।

सांची, मांडू और ओरछा का लाइव अनुभव

इस वर्चुअल टूर के जरिए बच्चों को सांची के स्तूप, बांधवगढ़ का किला, मांडू की ऐतिहासिक इमारतों और ओरछा के विरासत स्थलों का दीदार कराया जाएगा। आम तौर पर बच्चे इन ऐतिहासिक जगहों के बारे में सिर्फ किताबों में पढ़ते हैं, लेकिन अब वे आधुनिक तकनीक के जरिए इन्हें साक्षात महसूस कर पाएंगे।

पुरातत्व विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य इतिहास को किताबों से निकालकर दृश्य रूप में बच्चों के सामने प्रस्तुत करना है, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें और उससे जुड़ सकें।

तकनीक के इस इस्तेमाल से उन बच्चों को विशेष रूप से लाभ होगा जो आर्थिक या अन्य कारणों से इन ऐतिहासिक स्थलों की वास्तविक यात्रा नहीं कर पाते। अब क्लास में बैठकर ही सांची स्तूप और मांडू की सैर करेंगे बच्चे, पुरातत्व विभाग की अनोखी पहल

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