इंदौर: ‘अहिल्या पथ योजना’ के विरोध में किसानों का IDA दफ्तर पर जोरदार धरना, 1400 हेक्टेयर जमीन पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग

इंदौर: ‘अहिल्या पथ योजना’ के विरोध में किसानों का IDA दफ्तर पर जोरदार धरना, 1400 हेक्टेयर जमीन पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग

इंदौर/कटनी। इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) की बहुचर्चित ‘अहिल्या पथ योजना’ के कारण आठ गांवों की लगभग 1400 हेक्टेयर जमीन पिछले दो सालों से अधर में लटकी हुई है। योजना पर अमल न होने और जमीनों की खरीदी-बिक्री व डेवलपमेंट पर लगे कड़े प्रतिबंधों से नाराज प्रभावित किसानों ने बुधवार को आईडीए कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर बैठे किसानों ने मांग की कि उनकी जमीनों से सभी प्रकार के प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से हटाए जाएं।

क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2024 में इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) ने धार रोड स्थित ग्राम रिजलाय से उज्जैन रोड के रेवती तक 15 किलोमीटर लंबी ‘अहिल्या पथ’ सड़क और इसके अंतर्गत 5 अलग-अलग टाउन प्लानिंग स्कीमों का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि, राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए वापस लौटा दिया था कि सड़क के दोनों तरफ योजना प्रस्तावित कर दोबारा प्रस्ताव भेजा जाए। तब से यह मामला शासन स्तर पर अटका हुआ है।

8 गांवों के हजारों किसान परेशान, रुक गई खरीदी-बिक्री

रिजलाय, पालाखेडी, बुढ़ानिया और रेवती समेत आठ गांवों के हजारों किसान अपनी ही जमीन पर बेबस महसूस कर रहे हैं।

दाल-बाटी बनाने से रोका, भूखे-प्यासे बैठे रहे किसान

धरना दे रहे किसानों से मिलने आईडीए सीईओ परिक्षीत झाडे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे और आश्वासन दिया कि मामला शासन स्तर का है और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों की धरना समाप्त करने की अपील को किसानों ने खारिज कर दिया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि दिनभर भूखे-प्यासे बैठे किसानों ने जब शाम को सड़क किनारे पारंपरिक ‘मालवी दाल-बाटी’ बनाने की योजना बनाई, तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इसके बावजूद किसानों ने डटे रहने का फैसला किया।

5 चरणों में प्रस्तावित है अहिल्या पथ सड़क:

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