खरगोन उच्छिष्ट महागणपति मंदिर: गोद में नील सरस्वती, अग्नि में गणेश के दर्शन की मान्यता, 25 सितंबर को विशेष यज्ञ

हसनावद के पास मोरघड़ी में स्थित इस दुर्लभ गणपति मंदिर में महीने में एक बार मिलते हैं विशेष दर्शन, गणेशोत्सव के अंतिम दिन यज्ञ और हवन में शामिल होने दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु।

खरगोन। देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। घर-घर और मंदिरों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जा रही है। इस बीच मध्य प्रदेश के खरगोन जिले का एक प्राचीन और अनोखा गणपति मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सनावद के पास मोरघड़ी में स्थित उच्छिष्ट महागणपति मंदिर भगवान गणेश के दुर्लभ तांत्रिक स्वरूप, अनोखी प्रतिमा और विशेष पूजा पद्धति के लिए जाना जाता है।

गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ और हवन आयोजित किए जाते हैं। मान्यता है कि गणेशोत्सव के अंतिम दिन होने वाले विशेष यज्ञ में आहुति के दौरान भगवान गणेश के साक्षात दर्शन होते हैं। इसी धार्मिक मान्यता के चलते गणेशोत्सव के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कमलासन पर विराजमान हैं उच्छिष्ट महागणपति

 

मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा चतुर्भुज स्वरूप में कमलासन पर विराजमान है। प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि भगवान गणेश की गोद में नील सरस्वती देवी विराजमान हैं। भगवान के हाथ में अक्षत चावल दिखाई देते हैं और वे आशीर्वाद की मुद्रा में हैं।

धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं में भगवान गणेश के इस स्वरूप को तांत्रिक अथवा अघोरी स्वरूप से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि उच्छिष्ट महागणपति की आराधना सांसारिक सुख-सुविधाओं के साथ मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी की जाती है।

 

दुनिया में सिर्फ तीन मंदिर होने की मान्यता

 

मंदिर के पुजारी पंडित संदीप बर्वे के अनुसार, उच्छिष्ट महागणपति का यह मंदिर मध्य प्रदेश में अपनी तरह का इकलौता मंदिर है। उनके अनुसार दुनिया में उच्छिष्ट महागणपति के केवल तीन प्रमुख मंदिर होने की मान्यता है। इनमें एक दक्षिण भारत और दूसरा चीन में बताया जाता है, जबकि तीसरा मंदिर खरगोन जिले के मोरघड़ी में स्थित है।

पुजारी के मुताबिक, दक्षिण भारत और चीन में बताए जाने वाले पुराने मंदिरों के अब खंडहर होने की बात कही जाती है, जबकि मोरघड़ी में भगवान गणेश के इस स्वरूप के दर्शन आज भी किए जा सकते हैं।

महीने में सिर्फ एक दिन मिलते हैं विशेष दर्शन

 

मंदिर की पूजा परंपरा भी इसे अन्य गणपति मंदिरों से अलग बनाती है। यहां भगवान गणेश के गर्भगृह में विशेष दर्शन महीने में एक बार संकष्टी चतुर्थी के दिन होने की बात बताई जाती है।

इसके अलावा वर्ष में विशेष अवसर पर भी दर्शन की परंपरा है। गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव के अंतिम दिन यहां विशेष दर्शन आयोजित किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, दर्शन के दौरान भक्त पान, लड्डू या गुड़ ग्रहण करते हुए भगवान गणेश का दर्शन करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

गणेशोत्सव के अंतिम दिन होगा विशेष यज्ञ

गणेशोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में होने वाला विशेष यज्ञ इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा। मान्यता है कि हवन के दौरान अग्नि में भगवान गणेश के साक्षात दर्शन होते हैं।

इसी मान्यता के कारण गणेशोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने के लिए भक्तों को कुछ विशेष तैयारियां भी करनी होंगी।

25 सितंबर 2026 को होगा विशेष आयोजन

इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को गणेशोत्सव के अंतिम दिन मंदिर में विशेष यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पंडित संदीप बर्वे के अनुसार, यज्ञ में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को अपने घर पर एक नारियल पर स्वस्तिक बनाकर उसका पूजन करना होगा। इसके बाद पूजित नारियल को मंदिर लेकर आना होगा।

इसके साथ श्रद्धालुओं को सफेद कागज पर लाल स्याही से अपनी मनोकामना लिखकर भी साथ लानी होगी। यज्ञ के दौरान इसी नारियल से हवन कुंड में आहुति देने की परंपरा बताई गई है।

सुबह 8:45 बजे से शुरू होगा धार्मिक कार्यक्रम

 

25 सितंबर को होने वाले आयोजन की शुरुआत सुबह 8:45 बजे मंदिर परिसर में स्थापित देवी-देवताओं के पूजन से होगी। इसके बाद सुबह 9:30 बजे से 11 बजे तक संकल्प प्रक्रिया आयोजित की जाएगी।

इसके बाद सुबह 11:50 बजे अग्नि स्थापना के साथ विशेष यज्ञ प्रारंभ होगा। यज्ञ दोपहर तक चलने की जानकारी दी गई है।

यज्ञ में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाल वस्त्र पहनकर आना अनिवार्य बताया गया है।

 

सिर्फ दर्शन करने वाले भक्तों के लिए अलग व्यवस्था

 

जो श्रद्धालु यज्ञ में शामिल नहीं होकर केवल भगवान गणेश के दर्शन करना चाहते हैं, उन्हें दोपहर बाद मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए लाल वस्त्र पहनने की बाध्यता नहीं होगी।

 

गणेशोत्सव के अंतिम दिन होने वाला यह विशेष आयोजन खरगोन के उच्छिष्ट महागणपति मंदिर की अनोखी पूजा परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास आकर्षण का विषय बना हुआ है।

 

Disclaimer : मंदिर से जुड़ी साक्षात दर्शन, मनोकामना पूरी होने और मंदिरों की संख्या संबंधी बातें धार्मिक मान्यताओं के रूप में बताई जाती हैं।

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