अस्पतालों के बिलिंग खेल पर IAS तुकाराम मुंडे का खुलासा: 11 रुपये का IV सेट 29 गुना महंगा, सिरिंज पर 800% का मुनाफा
अस्पतालों के बिलिंग खेल पर IAS तुकाराम मुंडे का खुलासा: 11 रुपये का IV सेट 29 गुना महंगा, सिरिंज पर 800% का मुनाफा
अस्पतालों के बिलिंग खेल पर IAS तुकाराम मुंडे का खुलासा: 11 रुपये का IV सेट 29 गुना महंगा, सिरिंज पर 800% का मुनाफा
मुंबई/भोपाल। अस्पताल में भर्ती मरीज के बिल में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामानों (कंज्यूमेबल्स) की असली कीमत क्या होती है? महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर और वरिष्ठ IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने एक सर्वे का हवाला देकर निजी अस्पतालों की भारी मुनाफाखोरी की पोल खोल दी है।
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, जो IV सेट अस्पताल महज ₹11.50 में खरीदता है, मरीज को उसके बिल में वही सामान करीब 29 गुना अधिक कीमत पर थमा दिया जाता है।
खरीद दर (Trade Price) बनाम एमआरपी (MRP): लूट का गणित
तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अस्पताल की सप्लाई चेन में ट्रेड प्राइस और घोषित MRP के बीच के इस बड़े अंतर को उजागर किया है:
IV इन्फ्यूजन सेट: खरीद दर ₹11.50 – मरीज से वसूली गई कीमत लगभग 29 गुना ज्यादा।
मेडिकल सिरिंज: खरीद दर ₹6.75 – मरीज के बिल में दर्ज MRP ₹57.20 (लगभग 8.5 गुना अधिक)।
कैथेटर (Catheter): खरीद दर ₹29.41- मरीज से वसूली जाने वाली MRP ₹310.00 (लगभग 10.5 गुना अधिक)।
नियमन (Regulation) की कमी और सरकार को सिफारिश
दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ‘ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013’ और NPPA (नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइजिंग अथॉरिटी) की व्यवस्था लागू है, लेकिन अधिकांश मेडिकल डिवाइस और कंज्यूमेबल्स पर कोई फिक्स्ड प्राइस कैपिंग (कीमत सीमा) लागू नहीं है।
IAS तुकाराम मुंडे ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्युटिकल्स’ और NPPA से सिफारिश की है कि ट्रेड खरीद मूल्य और MRP के बीच के भारी अंतर को सीमित करने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन्स बनाई जाएं, ताकि अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लग सके और मरीजों को पारदर्शिता मिल सके। अस्पतालों के बिलिंग खेल पर IAS तुकाराम मुंडे का खुलासा: 11 रुपये का IV सेट 29 गुना महंगा, सिरिंज पर 800% का मुनाफा