कन्या संक्रांति 17 सितंबर को: सर्वार्थ सिद्धि योग में सूर्य उपासना से दूर होंगी करियर की बाधाएं

कन्या संक्रांति 17 सितंबर को: सर्वार्थ सिद्धि योग में सूर्य उपासना से दूर होंगी करियर की बाधाएं

संक्रांति का धार्मिक महत्व ज्योतिष शास्त्र में संक्रांति तिथि को सूर्य देव की उपासना के लिए अत्यंत विशेष माना गया है। जब सूर्य देव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन संक्रांति मनाई जाती है। 17 सितंबर को सूर्य देव कन्या राशि में गोचर करेंगे, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान और अर्घ्य देने से सूर्य ग्रह से जुड़े दोष शांत होते हैं और करियर में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

शुभ मुहूर्त और विशेष योग वैदिक पंचांग के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जिसमें किया गया पूजा-पाठ और दान-पुण्य अक्षय फल प्रदान करता है।

  • महापुण्य काल: सुबह 7:58 बजे से सुबह 10:01 बजे तक (स्नान-दान के लिए सर्वश्रेष्ठ समय)

  • पुण्य काल: सुबह 7:58 बजे से दोपहर 2:31 बजे तक

कन्या संक्रांति पर करें ये 4 विशेष उपाय:

  1. सूर्य देव को अर्घ्य एवं स्तोत्र पाठ: स्नान के बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लें। उसमें लाल फूल, लाल चंदन और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर ॐ सूर्य देवाय नमः मंत्र बोलते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके पश्चात आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और आरती उतारें। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

  2. सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान: इस दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार गुड़, गेहूं, लाल चंदन, लाल वस्त्र, लाल फूल और तांबे के बर्तनों का दान किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को करें।

  3. मंत्र जाप: लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से ॐ घृणिः सूर्याय नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

  4. बड़ों का आशीर्वाद और पितृ तर्पण: संक्रांति पर माता-पिता व घर के बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। जिनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं, वे पितरों का जल से तर्पण करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

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