चीन-पाक चुनौतियों के बीच भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण: AI, ड्रोन तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस; देखें मुख्य बिंदु

चीन-पाक चुनौतियों के बीच भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण: AI, ड्रोन तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस; देखें मुख्य बिंदु

नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान से जुड़ी दोहरी सुरक्षा चुनौतियों और बदलते युद्ध के तौर-तरीकों के बीच भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को तेजी से आधुनिक बना रही है। सेना पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम, साइबर, क्वांटम और हाइपरसोनिक तकनीकों को शामिल कर भविष्य के युद्धों के लिए खुद को तैयार कर रही है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन और काउंटर-ड्रोन पर विशेष जोर

‘आत्मनिर्भर भारत’: रक्षा खरीद और गोला-बारूद का स्वदेशीकरण

भारतीय सेना “Modernisation through Indigenisation” (स्वदेशीकरण के जरिए आधुनिकीकरण) के मंत्र पर काम कर रही है:

क्षेत्र / मद स्वदेशीकरण का दायरा / आंकड़े
कैपिटल कॉन्ट्रैक्ट्स पिछले 3 वर्षों के 122 कॉन्ट्रैक्ट्स में से 120 स्वदेशी कंपनियों (लगभग ₹1 लाख करोड़) को दिए गए।
10 वर्षों की कुल खरीद घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री/DPSUs से लगभग ₹2.31 लाख करोड़ के उपकरण खरीदे गए।
घरेलू:विदेशी भुगतान अनुपात वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह अनुपात 87:13 रखा गया है।
एम्युनिशन (गोला-बारूद) 175 में से 159 एम्युनिशन वैरिएंट (91%) स्वदेशी हैं; 2025-26 में ₹15,899 करोड़ का उत्पादन नियोजित।

AI और आधुनिक तकनीक: ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ से लेकर ‘लक्ष्य-PT’ तक

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