चीन-पाक चुनौतियों के बीच भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण: AI, ड्रोन तकनीक और आत्मनिर्भरता पर फोकस; देखें मुख्य बिंदु
नई दिल्ली। चीन और पाकिस्तान से जुड़ी दोहरी सुरक्षा चुनौतियों और बदलते युद्ध के तौर-तरीकों के बीच भारतीय सेना अपनी युद्ध क्षमता को तेजी से आधुनिक बना रही है। सेना पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम, साइबर, क्वांटम और हाइपरसोनिक तकनीकों को शामिल कर भविष्य के युद्धों के लिए खुद को तैयार कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन और काउंटर-ड्रोन पर विशेष जोर
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कोर कमेटी और SPV: ड्रोन व काउंटर-ड्रोन तकनीक को ‘वॉर फूटिंग’ (युद्ध स्तर) पर हासिल करने के लिए एक Core Committee बनाई गई है और एक विशेष Special Purpose Vehicle (SPV) का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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9 फास्ट ट्रैक प्रोजेक्ट्स: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए ADITI और DISC के तहत 9 Fast Track Development Projects शुरू किए गए हैं।
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इन-हाउस 819 ड्रोन का निर्माण: भारतीय सेना ने अपनी इन-हाउस सुविधाओं और MSMEs के सहयोग से 819 ड्रोन तैयार किए हैं, जिनमें 193 सर्विलांस, 337 कामिकाजे/आर्म्ड और 289 FPV ड्रोन शामिल हैं।
‘आत्मनिर्भर भारत’: रक्षा खरीद और गोला-बारूद का स्वदेशीकरण
भारतीय सेना “Modernisation through Indigenisation” (स्वदेशीकरण के जरिए आधुनिकीकरण) के मंत्र पर काम कर रही है:
| क्षेत्र / मद | स्वदेशीकरण का दायरा / आंकड़े |
| कैपिटल कॉन्ट्रैक्ट्स | पिछले 3 वर्षों के 122 कॉन्ट्रैक्ट्स में से 120 स्वदेशी कंपनियों (लगभग ₹1 लाख करोड़) को दिए गए। |
| 10 वर्षों की कुल खरीद | घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री/DPSUs से लगभग ₹2.31 लाख करोड़ के उपकरण खरीदे गए। |
| घरेलू:विदेशी भुगतान अनुपात | वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह अनुपात 87:13 रखा गया है। |
| एम्युनिशन (गोला-बारूद) | 175 में से 159 एम्युनिशन वैरिएंट (91%) स्वदेशी हैं; 2025-26 में ₹15,899 करोड़ का उत्पादन नियोजित। |
AI और आधुनिक तकनीक: ‘प्रोजेक्ट कौटिल्य’ से लेकर ‘लक्ष्य-PT’ तक
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Nag Mk-2 मिसाइल: पोखरण में स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल नाग Mk-2 और मिसाइल कैरियर वर्जन-2 के सफल फील्ड ट्रायल पूरे किए गए।
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प्रोजेक्ट कौटिल्य (Project Kautilya): ब्रिगेड स्तर के डेटा को प्रोसेस कर कमांडरों के लिए AI आधारित अलर्ट और रिमाइंडर तैयार करने वाला सिस्टम।
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LAKSHYA-PT: हाई-रेजोल्यूशन 3D डेटा के जरिए सीमा पार सटीक टारगेट एक्विजिशन के लिए ADRIN के साथ विकसित किया जा रहा सॉफ्टवेयर।
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PRAKSHEPAN: मौसम, बाढ़, भूस्खलन और हिमस्खलन की सटीक भविष्यवाणी करने वाला AI-आधारित मिलिट्री क्लाइमेटोलॉजी एप्लिकेशन।
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SWAYAT प्रयोग: बबिना फील्ड फायरिंग रेंज में 59 ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया।
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