चेतनोदय तीर्थ की भूमि नहीं बिकेगी, जैन समाज ने महासभा में लिया सर्वसम्मत निर्णय,धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा समर्पित भूमि के विक्रय पर रोक, तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण और विकास का लिया संकल्प

चेतनोदय तीर्थ की भूमि नहीं बिकेगी, जैन समाज ने महासभा में लिया सर्वसम्मत निर्णय,धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा समर्पित भूमि के विक्रय पर रोक, तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण और विकास का लिया संकल्प

 

कटनी। चेतनोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र एवं गौशाला की भूमि की सुरक्षा को लेकर रविवार, 13 सितंबर को जैन धर्मशाला में जैन समाज की महासभा आयोजित हुई। महासभा में शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन, दयोदय पशु सेवा कमेटी के सदस्य, दिगंबर जैन पंचायत के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा सवाई सिंघई कन्हैया लाल गिरधारी लाल जैन धर्मार्थ औषधालय ट्रस्ट के ट्रस्टी उपस्थित रहे। बैठक में तीर्थ क्षेत्र की भूमि से जुड़े विषय पर विस्तृत चर्चा के बाद समाजजनों की राय ली गई।

महासभा में विभिन्न पक्षों और समाजजनों के विचार सार्वजनिक रूप से सुने गए। विचार-विमर्श के बाद पंचायत अध्यक्ष संजय जैन ने उपस्थित समाजजनों से हाथ उठाकर सहमति प्राप्त की। इसके पश्चात महासभा में निर्णय लिया गया कि वर्ष 2012 में सवाई सिंघई कन्हैया लाल गिरधारी लाल जैन धर्मार्थ औषधालय ट्रस्ट द्वारा श्री सकल दिगंबर जैन पंचायत को समर्पित की गई समस्त भूमि में से किसी भी हिस्से का विक्रय नहीं किया जाएगा।

इसी प्रकार 15 मार्च 1999 को दयोदय पशु सेवा के तत्कालीन अध्यक्ष सवाई सिंघई अभय कुमार जैन एवं मंत्री सवाई सुधीर कुमार जैन द्वारा रजिस्टर्ड लीज डीड एवं रजिस्टर्ड दानपत्र के माध्यम से प्रदान की गई भूमि में से भी किसी हिस्से का विक्रय नहीं किए जाने का निर्णय लिया गया।

तीर्थ को और विकसित करने का संकल्प

महासभा में समाजजनों ने तीर्थ क्षेत्र की भूमि को सुरक्षित रखते हुए उसके धार्मिक एवं आध्यात्मिक विकास में उपयोग करने का संकल्प व्यक्त किया। समाजजनों का कहना रहा कि चेतनोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र आज जैन समाज की महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहर के रूप में विकसित हो चुका है। पूज्य सुधा सागर मुनि महाराज के आशीर्वाद से यहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियां निरंतर संचालित हो रही हैं। आगामी समय में चौबीसी निर्माण की भी योजना है।

महारैली के बाद महासभा में एकजुट हुआ समाज

महासभा को संबोधित करते हुए चेतनोदय तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष अनुराग जैन ने कहा कि भूमि के संबंध में जैन समाज द्वारा पूर्व में महारैली निकालकर विरोध दर्ज कराया गया था तथा कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले से प्रशासन को अवगत कराया गया था।

उन्होंने कहा कि तीर्थ क्षेत्र की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए समाज की एकजुटता आवश्यक है। यह भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि जैन समाज की धार्मिक आस्था, श्रद्धा और वर्षों की साधना से जुड़ी धरोहर है। उन्होंने समाजजनों से तीर्थ क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने की अपील की।

महासभा में उपस्थित समाजजनों ने भूमि के विक्रय पर रोक संबंधी निर्णय का स्वागत करते हुए तीर्थ क्षेत्र की भूमि को सुरक्षित रखने और इसके विकास को आगे बढ़ाने पर अपनी सहमति व्यक्त की।

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