CSP नेहा पच्चीसिया मामले में हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से जवाब तलब; 21 सितंबर को अंतरिम राहत पर सुनवाई

कटनी CSP की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा विस्तृत जवाब, 21 सितंबर को अंतरिम राहत पर होगी सुनवाई

जबलपुर। कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया से जुड़े चर्चित मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर विचार किया जाएगा।

 

यह मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। याचिका WP No. 37216 of 2026 के माध्यम से निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने हाईकोर्ट का रुख किया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम सुरक्षा और किसी भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई।

 

क्या है नेहा पच्चीसिया मामला?

 

जानकारी के मुताबिक, कुठला थाने में पद के कथित दुरुपयोग, धोखाधड़ी और जमीन से जुड़े गंभीर आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ हनफी के नाम भी सामने आए हैं।

 

अभियोजन की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि हत्या के एक मामले में आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए चार्जशीट पेश करने में कथित तौर पर देरी की गई। इसके बाद आरोपी के परिजनों पर दबाव डालकर करोड़ों रुपये की बताई जा रही जमीन को काफी कम कीमत पर संबंधित लोगों के नाम हस्तांतरित कराने का आरोप लगाया गया है।

 

हालांकि, ये सभी आरोप जांच और अभियोजन के पक्ष से जुड़े हैं और मामले में अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।

 

नेहा पच्चीसिया की ओर से हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?

 

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और अधिवक्ता प्रियंक अग्रवाल ने अदालत के सामने पक्ष रखा। उन्होंने याचिकाकर्ता को मामले में दुर्भावनापूर्वक फंसाए जाने का दावा किया।

 

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एफआईआर को उसके मूल स्वरूप में देखने पर भी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ किसी प्रत्यक्ष अपराध का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का अन्य सह-आरोपियों के साथ कोई प्रत्यक्ष संबंध या आपराधिक सांठगांठ नहीं है।

 

वकीलों ने अदालत को यह भी बताया कि नेहा पच्चीसिया दो छोटे बच्चों की मां हैं और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उनके ऊपर है। इसी मानवीय पहलू का हवाला देते हुए अदालत से अंतिम निर्णय तक अंतरिम सुरक्षा देने और किसी भी कठोर कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई।

 

राज्य सरकार ने अंतरिम राहत का किया विरोध

 

वहीं, राज्य सरकार और अभियोजन ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दिए जाने का विरोध किया। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता एच.एस. रूपराह और शासकीय अधिवक्ता अमित पांडेय ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।

 

अभियोजन की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं और एफआईआर दर्ज होने के बाद से उपलब्ध नहीं हैं। अभियोजन ने यह भी दलील दी कि उनके देश से बाहर जाने की आशंका को देखते हुए लुकआउट नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

 

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि कटनी की सत्र अदालत में याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत अर्जी पहले ही खारिज हो चुकी है।

 

सह-आरोपी के साथ संबंध को लेकर अभियोजन का दावा

 

सुनवाई के दौरान अभियोजन ने नेहा पच्चीसिया और सह-आरोपी क्षितिज राज बारापात्रे के बीच कथित संबंध और सांठगांठ का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा।

 

अभियोजन ने जांच और पुलिसकर्मियों के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि दोनों एक ही घर में रहते थे। अभियोजन के मुताबिक, जिला अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों ने एक-दूसरे को पहचानने से इनकार किया था।

 

इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत द्वारा आगे की सुनवाई और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही सामने आएगा।

 

बिना वकालतनामा पेश हुए अधिवक्ता को हाईकोर्ट की हिदायत

 

सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता अवनीश तिवारी अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने खुद को मामले में प्रतिवादी क्रमांक 3 यानी शिकायतकर्ता की ओर से पेश होने वाला अधिवक्ता बताया।

 

अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष दावा किया कि उन्हें याचिकाकर्ता की ओर से शिकायत वापस लेने के लिए जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

 

इस पर न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने मामले में अपना वकालतनामा दाखिल किया है। अधिवक्ता द्वारा वकालतनामा दाखिल नहीं किए जाने की बात स्वीकार करने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें भविष्य के लिए हिदायत दी।

 

अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना वैध अधिकार-पत्र या वकालतनामा के किसी पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष दलील रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने आगे से बहस शुरू करने से पहले अनुमति लेने की बात कही।

 

21 सितंबर को होगा अगला फैसला

 

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम अथवा अंतिम राहत पर विचार करने से पहले राज्य सरकार का जवाब रिकॉर्ड पर आना जरूरी है। इसलिए राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

 

अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। इसी दिन हाईकोर्ट ने नेहा पच्चीसिया की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत पर विचार करने की बात कही है।

 

फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। इसलिए 21 सितंबर की सुनवाई इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

नोट: मामले में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों और अभियोजन की दलीलों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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