‘दो कमरों की यूनिवर्सिटी’: जबलपुर के गढ़ा शासकीय कॉलेज में एक ही कमरे में बैठ रहे BA, BSc और BCom के छात्र
'दो कमरों की यूनिवर्सिटी': जबलपुर के गढ़ा शासकीय कॉलेज में एक ही कमरे में बैठ रहे BA, BSc और BCom के छात्र
‘दो कमरों की यूनिवर्सिटी’: जबलपुर के गढ़ा शासकीय कॉलेज में एक ही कमरे में बैठ रहे BA, BSc और BCom के छात्र
जबलपुर/कटनी। उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच संस्कारधानी के गढ़ा क्षेत्र से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। गढ़ा स्थित शासकीय कॉलेज में संसाधनों की भारी कमी के चलते विद्यार्थियों का भविष्य दो कमरों के बीच सिमट कर रह गया है। आलम यह है कि कॉलेज की पूरी व्यवस्था महज दो कमरों पर टिकी हुई है।
एक कमरे में स्टाफ, दूसरे में 3 साल के छात्र
कॉलेज के बुनियादी ढांचे का हाल यह है कि उपलब्ध दो कमरों में से:
पहला कमरा: कॉलेज के प्रशासनिक कार्य और स्टाफ के बैठने के लिए इस्तेमाल होता है।
दूसरा कमरा: इसी एकलौते कमरे में स्नातक (Graduation) प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष और तृतीय वर्ष—तीनों ही वर्षों की कक्षाएं संचालित की जाती हैं।
अलग-अलग वर्षों के विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्र शैक्षणिक कक्ष (Classrooms) उपलब्ध न होने के कारण पढ़ाई में भारी व्यवधान आ रहा है।
स्कूल की छुट्टी के बाद शुरू होती हैं कॉलेज की कक्षाएं
संसाधनों की इस बदहाली की मुख्य वजह कॉलेज का अपना खुद का भवन न होना है।
वर्तमान में यह शासकीय कॉलेज एक स्थानीय स्कूल परिसर में संचालित किया जा रहा है।
कमरों की कमी के कारण कॉलेज प्रबंधन और विद्यार्थियों को पहले स्कूल की छुट्टी होने का इंतजार करना पड़ता है।
स्कूल छूटने के बाद ही कॉलेज की कक्षाएं लग पाती हैं, जिससे पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिल पाता।
स्थानीय निवासियों और छात्रों ने उच्च शिक्षा विभाग से गढ़ा शासकीय कॉलेज के लिए जल्द से जल्द स्वतंत्र भवन और पर्याप्त संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग की है। ‘दो कमरों की यूनिवर्सिटी’: जबलपुर के गढ़ा शासकीय कॉलेज में एक ही कमरे में बैठ रहे BA, BSc और BCom के छात्र