शासकीय कन्या महाविद्यालय में बलराम जयंती पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजि
कटनी- उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार शासकीय कन्या महाविद्यालय, कटनी में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, एन.सी.सी. एवं एन.एस.एस. के संयुक्त तत्वावधान में भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता भगवान बलराम की जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बलराम जयंती के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं कृषि संबंधी महत्व पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री नागेंद्र यादव ने भगवान बलराम के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में भगवान बलराम को शक्ति, पराक्रम, अनुशासन तथा कृषि संस्कृति के प्रतीक के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने बलराम जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से छात्राओं को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के मूल्यों से परिचित कराया तथा कृषि को भारतीय सभ्यता और जीवन-पद्धति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने बलराम जयंती की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कृषि उपकरणों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से हल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान बलराम का हल केवल एक कृषि उपकरण नहीं, बल्कि भारतीय कृषि संस्कृति, श्रम, आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है। उन्होंने छात्राओं से भारतीय ज्ञान परंपरा के समृद्ध मूल्यों को समझने तथा उन्हें अपने जीवन से जोड़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन श्रीमती प्रियंका सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में रश्मि सिंह ने अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने में सभी के सहयोग की सराहना की।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. रोशनी पाण्डेय, स्मृति दहायत, श्रीमती श्वेता कोरी एवं मीनाक्षी वर्मा का विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार के समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, कृषि संस्कृति, श्रम एवं प्रकृति के प्रति सम्मान से परिचित कराना तथा भगवान बलराम के जीवन और आदर्शों के माध्यम से कृषि एवं आत्मनिर्भरता के महत्व को समझाना रहा। कार्यक्रम ने छात्राओं में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों एवं कृषि परंपराओं के प्रति जागरूकता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।