Jabalpur High Court Action: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को बड़ी राहत, नियमितीकरण निलंबन पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक
Jabalpur High Court Action: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को बड़ी राहत, नियमितीकरण निलंबन पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक
जबलपुर: जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के कर्मचारियों के पक्ष में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. विश्वविद्यालय के कुलगुरु (कुलपति) द्वारा कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) को निलंबित किए जाने के आदेश पर हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक (Interim Stay) लगा दी है.
न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने शरद सिंह कौशिक एवं अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह राहत प्रदान की.
‘अनियमितता का कोई ठोस आधार नहीं’- हाई कोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है जो नियमितीकरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की धांधली या अनियमितता को साबित करता हो.
कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि जब तक विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक कुलगुरु द्वारा जारी किया गया 14 जुलाई, 2026 का निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा.
कोर्ट में हुई पक्ष-विपक्ष की बहस
याचिकाकर्ताओं का पक्ष: याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता अवधेश कुमार अहिरवार ने पैरवी की. उन्होंने दलील दी कि कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह विधिसम्मत और नियमों के तहत हुई थी. अतः कर्मचारियों के प्रशासनिक व सेवा अधिकारों को बहाल रखा जाना चाहिए.
कैविएटर और शासन का पक्ष: कैविएटर की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने अनियमितता की आशंका जताते हुए विश्वविद्यालय द्वारा जांच समिति के गठन की जानकारी दी. वहीं, राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता हितेंद्र सिंह कोर्ट में उपस्थित हुए.
अंडरटेकिंग देने की शर्त पर मिली राहत
हाई कोर्ट ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए एक शर्त भी रखी है. कोर्ट के आदेशानुसार, कर्मचारियों को इस आशय की अंडरटेकिंग (Undertaking) देनी होगी कि जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आगामी फैसला मान्य होगा.