शिक्षक दिवस पर पीएमसीओई शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित,शिक्षकों ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में गुरु की भूमिका को बताया महत्वपूर्
कटनी। शिक्षक दिवस के अवसर पर पीएमसीओई शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कटनी में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस आयोजन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन को याद करते हुए देश शिक्षा के प्रति उनके बहुमूल्य योगदान को रेखांकित किया गया। इसी क्रम में महाविद्यालय में एक विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें प्राचार्य, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने शिक्षक की भूमिका, शिक्षा के बदलते स्वरूप तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षक के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।
आज के कार्यकम की शुरुवात डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तेलचित्र पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार वाजपेई ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके भविष्य को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना भी आवश्यक है।
आज के इस कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गर्ग ने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। एक शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। गुरु के आध्यात्मिक और संस्कृतिक महत्व को भी उन्होंने सामने रखा।
डॉ. के.पी. मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस हमें अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और डिजिटल युग में शिक्षा के साधन भले बदल गए हों, लेकिन शिक्षक का महत्व आज भी उतना ही प्रासंगिक है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है।
डॉ. प्रतिमा त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की सफलता के पीछे एक महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति होता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सकारात्मक सोच विकसित करने में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ उठाते हुए निरंतर सीखने और आगे बढ़ने का आह्वान किया।
संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सरदार दिवाकर ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की सोच और उसके संस्कार का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। इसलिए शिक्षक का दायित्व केवल विषय ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों और सामाजिक चेतना का विकास करना भी है।
कार्यक्रम का संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. अतुल कुमार ने किया। उन्होंने शिक्षक दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में मार्गदर्शक, प्रेरक और पथप्रदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद जितना बेहतर होगा, शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने की प्रक्रिया उतनी ही प्रभावी होगी।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. विजय कुमार ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस का यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के प्राचार्य, सभी प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक सार्थक बनाया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों की ओर से दुर्गा बर्मन, मुकेश, अंजलि, मधु, नितिन एवं रिया ने शिक्षक दिवस के महत्व, गुरु-शिष्य संबंध तथा अपने जीवन में शिक्षकों की भूमिका पर अपने बहुमूल्य विचार व्यक्त किए। विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन को अपने जीवन की महत्वपूर्ण प्रेरणा बताया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के सभी संकायों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर शिक्षक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो व्ही के द्विवेदी, अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो नाहिद सिद्दीकी, श्री सागर पटेल, डॉ नरेश कुलस्ते, सुश्री निधि परमार, तथा अन्य कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया।
