अपने वेतन और GPF से स्कूल संवारा, अब राज्यपाल करेंगे शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर का सम्मान,जर्जर और उपेक्षित विद्यालय को बनाया सर्वसुविधायुक्त, नवाचारपूर्ण शिक्षण से बदली बच्चों की तस्वीर; 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर भोपाल में मिलेगा राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान

अपने वेतन और GPF से स्कूल संवारा, अब राज्यपाल करेंगे शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर का सम्मान,जर्जर और उपेक्षित विद्यालय को बनाया सर्वसुविधायुक्त, नवाचारपूर्ण शिक्षण से बदली बच्चों की तस्वीर; 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर भोपाल में मिलेगा राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मा

 

 

कटनी। शिक्षक दिवस के अवसर पर 5 सितंबर को कटनी जिले के शिक्षक महेंद्र सिंह ठाकुर, सहायक शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक, शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय गौरा, विकासखंड ढीमरखेड़ा को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल के करकमलों से उन्हें यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों, विद्यालय विकास, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धति और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के आधार पर प्रदान किया जाएगा।

महेंद्र सिंह ठाकुर ने वर्ष 2015 में विद्यालय का प्रभार संभालने के बाद विद्यालय की स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। उस समय विद्यालय अनेक समस्याओं से जूझ रहा था। भवन जर्जर था, परिसर बीहड़ और अव्यवस्थित था, शैक्षणिक वातावरण प्रभावी नहीं था तथा शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की संख्या भी अधिक थी। विद्यार्थियों की दक्षता में कमी और पारंपरिक शिक्षण पद्धति के कारण सीखने में भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे थे।

अपने वेतन से विद्यालय में लगाए करीब 19 लाख रुपये

विद्यालय की स्थिति का स्वयं मूल्यांकन करने के बाद ठाकुर ने शिक्षकों, शाला प्रबंधन समिति, बाल कैबिनेट, विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामवासियों, पंचायत प्रतिनिधियों और समाजसेवियों के सहयोग से विद्यालय उन्नयन की कार्ययोजना तैयार की। उन्होंने अपने वेतन से नियमित बचत कर विद्यालय भवन की मरम्मत, पुताई, परिसर का समतलीकरण, गार्डन निर्माण, पुस्तकालय, फर्नीचर और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था शुरू की।

विद्यालय में डेस्क-बेंच, पर्दे, एलसीडी टीवी, प्रोजेक्टर, सीसीटीवी कैमरे, पंखे, कूलर, इन्वर्टर, सरस्वती मंदिर, फव्वारा, कृत्रिम झरना, गार्डन लाइट सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की गईं। परिसर में लगभग 500 प्रकार के फल एवं फूलदार पौधे लगाकर आकर्षक एवं आनंददायक वातावरण तैयार किया गया। व्यवसायिक शिक्षा के लिए भी लाखों रुपये की सामग्री स्वयं के संसाधनों से उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा अपने GPF की राशि से लगभग 8 लाख रुपये खर्च कर मंदिरनुमा भव्य प्रवेश द्वार और बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है। शिक्षक के अनुसार वर्ष 2015 से अब तक विद्यालय के विकास में उनके वेतन और GPF से करीब 19 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

रटने की जगह खेल-खेल में सीखने पर जोर

ठाकुर ने शैक्षणिक क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव किए। कक्षा में विद्यार्थियों की अलग-अलग सीखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान दिया गया। स्थानीय संसाधनों से शिक्षण सामग्री तैयार कर कठिन विषयों को सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से समझाने के लिए नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों का प्रयोग किया गया। बच्चों को खेल-खेल में सीखने के अवसर दिए गए और रटने की पारंपरिक प्रक्रिया को हतोत्साहित किया गया।

इसका परिणाम भी उल्लेखनीय रहा। विद्यालय के विद्यार्थी NMMS, ओलंपियाड, उत्कृष्ट विद्यालय प्रवेश परीक्षा, मॉडल स्कूल प्रवेश परीक्षा और विज्ञान प्रदर्शनी जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर रहे हैं। वार्षिक परीक्षाओं में भी विद्यालय का परिणाम 100 प्रतिशत तक रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े गांव के करीब 90 प्रतिशत बच्चे आज शासकीय एवं अशासकीय क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर बेहतर जीवन यापन कर रहे हैं।

अकादमिक के साथ व्यवसायिक शिक्षा भी

विद्यालय में विषय आधारित शिक्षा के साथ बच्चों को संगीत, नाट्य कला, नृत्य, वास्तुकला, चित्रकारी, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर, वेल्डिंग और बागवानी जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके लिए अतिरिक्त समय और ग्रीष्मकालीन अवकाश का उपयोग किया जाता है। उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और बहुआयामी बनाना है।

14 अगस्त के निरीक्षण में अधिकारियों ने की सराहना

14 अगस्त 2026 को कलेक्टर आशीष तिवारी, जिला पंचायत सीईओ, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी, संयुक्त संचालक शिक्षा जबलपुर, डीपीसी सहित अन्य अधिकारियों ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए विद्यालय की व्यवस्थाओं और शैक्षणिक स्तर की सराहना की। इस दौरान विद्यालय के लिए पुस्तकालय कक्ष, अतिरिक्त कक्ष, डेस्क-बेंच, डिजिटल बोर्ड तथा बालक-बालिका शौचालय उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।

एक शिक्षक के समर्पण, व्यक्तिगत संसाधनों के उपयोग, नवाचारपूर्ण शिक्षण और सामुदायिक सहभागिता से बदला यह विद्यालय अब ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यालय विकास की प्रेरणादायी मिसाल बन गया है। इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए महेंद्र सिंह ठाकुर को शिक्षक दिवस पर राज्यपाल के हाथों राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान प्राप्त होगा।

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