फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में पूर्व नायब तहसीलदार, पटवारी और सचिव समेत 7 लोगों पर FIR दर्ज करने के आदेश
भिंड: मध्य प्रदेश के भिंड जिले से इस वक्त की एक बड़ी कानूनी और प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। भिंड की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) निधि नीलेश श्रीवास्तव की अदालत ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र (Fake Birth Certificate) बनाकर एक व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई से बचाने के गंभीर मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार, पटवारी, ग्राम पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत कुल सात लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
माननीय कोर्ट ने सिटी कोतवाली थाना पुलिस को निर्देशित किया है कि इस आदेश का तत्काल पालन करते हुए आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और मामले की जांच रिपोर्ट अविलंब न्यायालय में पेश की जाए। इस कड़े अदालती आदेश के बाद भिंड के प्रशासनिक और राजस्व महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला एक आरोपी को कानूनी शिकंजे से बचाने के लिए सरकारी मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार करने से जुड़ा हुआ है:
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दस्तावेजों में हेराफेरी: एक व्यक्ति को पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जन्म तिथि में बदलाव कर एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया गया था।
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अधिकारियों की मिलीभगत: जांच के दौरान यह पाया गया कि इस कृत्य में निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक की भूमिका संदिग्ध थी। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में पूर्व नायब तहसीलदार, पटवारी और सचिव समेत 7 लोगों पर FIR दर्ज करने के आदेश
इन 7 लोगों पर दर्ज होगी FIR
न्यायालय के आदेश के बाद सिटी कोतवाली पुलिस अब जिन सात लोगों पर केस दर्ज करने जा रही है, उनमें शामिल हैं:
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तत्कालीन नायब तहसीलदार (राजस्व विभाग)
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हल्का पटवारी
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ग्राम पंचायत सचिव
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स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
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इसके अलावा इस साजिश में शामिल तीन अन्य व्यक्ति जिन्होंने फर्जी दस्तावेज बनवाने में मुख्य भूमिका निभाई।
कोर्ट की सख्त हिदायत: तत्काल दर्ज हो प्रकरण
सीजेएम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भिंड की सिटी कोतवाली पुलिस को साफ निर्देश दिए हैं कि इस साजिश में शामिल लोकसेवकों (Public Servants) और अन्य आरोपियों पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। इस मामले में पुलिस द्वारा बरती गई किसी भी तरह की ढिलाई को कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों पर कोर्ट के इस डंडे के बाद पूरे जिले के शासकीय गलियारों में खलबली मची हुई है।
– यशभारत डॉट कॉम
