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श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री 1008 श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बनाया गया

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कटनी। दिग.जैन बोर्डिग हाउस परिसर में प.पू. आर्यिका रत्न श्री 105 भावनामति माता जी एवं आर्यिक संघ के पावन सानिध्य में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री 1008 श्रेयांसनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव बनाया गया।
इस अवसर पर निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य पं.शैलेन्द्र जैन-शैलू परिवार को तथा सोने की राखी समर्पित करने का सौभाग्य स.सि.उत्तमचंद अनुराग जैन, अनुज जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
मुकुट सप्तमी के दिन आयोजित प्रतियोगिता के पुरूस्कार कमल जैन-बर्तन वाले परिवार द्वारा बांटा गया इस अवसर पर प.पू.आर्यिका भावनामति माता जी ने चर्चा करते हुये कहां रक्षाबंधन पर्व का बड़ा महत्व है और यह पर्व भाई-बहन वात्सल्य प्रेम का पर्व है।
उन्होने ने आगे कहा किसी समय आज के दिन उज्जैनी नगरी प.पू.अंकम्पनाचार्य अपने शिष्यों के साथ उज्जैन नगर में विराजमान थे वहां का राजा जैनधर्म के प्रति श्रद्धाभाव रखता था परन्तु उसके चार मंत्री जैन धर्म के विरोधी थे वे राजा के साथ आचार्य श्री के दर्शन करने के लिये गये।
अनावश्यक विवाद को टालने के लिए आचार्य सारे साधुओ के  निर्देश दिये कि उनसे कोई वाद-विवाद नही करेगा परन्तु श्रुतसागर मुनिराज बाहर गये थे उनको यह जानकारी नहीं थी उन्होने ने मंत्रियों से तर्क-विर्तक करके जैन धर्म की सत्यता को सिद्ध कर दिया मंत्री लोग अपने-आप को अपमानित महसूस करने लगे जैसे ही मुनिराज को आचार्य को बताया उन्होने उसी स्थान पर खड़े होने का निर्देश दिया मंत्रियों ने आकर मुनिराज के ऊपर आक्रमण कर दिया। देवों ने सहायता की और उनको उसी रूप में पीड़ित कर दिया राजा ने मंत्रियों को देश निकाला दे दिया है।
अकंम्पनाचार्य के 700 शिष्यों के साथ हस्तिनापुर पहुंच गये और चारो मंत्री भी देश निकालके के कारण हस्तिनापुर पहुंच गये वहां के राजा को खुश करके 07 दिन का राज्य प्राप्त कर लिया और अकंम्पनाचार्य आदि 700 मुनिराजों पर  ने घोर उपसर्ग  किया विष्णु कुमार मुनिराज विक्रिया से 52 अंगुल का रूप बनाकर तीन पग जमीन मांगी फिर अपना रूप बढ़ा करके बली आदि की रक्षा की तब से रक्षाबंधन पर्व मंगाया जाता हैं। कार्यक्रम का संचालन पंडित विकास शास्त्री द्वारा किया ।
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