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जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का नोटिस, 208 सांसदों ने जताया अविश्वास

कुवैत में बिगड़ी गुलाम नबी आजाद की तबीयत, अस्पताल में भर्ती, दुनिया के सामने पाकिस्तान को कर रहे बेपर्दा बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में खाड़ी देशों की यात्रा पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य गुलाम नबी आजाद की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें कुवैत के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वो अब डॉक्टरों की निगरानी में हैं. कुवैत में बिगड़ी गुलाम नबी आजाद की तबीयत, अस्पताल में भर्ती, दुनिया के सामने पाकिस्तान को कर रहे बेपर्दा गुलाम नबी आजाद TV9 Bharatvarsh TV9 Bharatvarsh | Updated on: May 28, 2025 | 6:45 AM ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को दुनिया के सामने बेनकाब करने बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा के नेतृत्व में खाड़ी देशों की यात्रा पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य गुलाम नबी आजाद की तबीयत बिगड़ गई है. उन्हें कुवैत के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वो अब डॉक्टरों की निगरानी में हैं. सांसद पांडा ने इस बारे में जानकारी दी है. सांसद बैजयंत जय पांडा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया ‘हमारे प्रतिनिधिमंडल के दौरे के आधे रास्ते में गुलाम नबी आजाद को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. उनकी हालत स्थिर है, वो डॉक्टरों देखरेख में हैं और उनकी कुछ चिकित्सकीय जांच की जाएंगी’. इसके साथ ही सांसद ने ये भी कहा ‘बहरीन और कुवैत में बैठकों में उनका योगदान अत्यधिक प्रभावशाली था और वे बिस्तर पर पड़े होने से निराश हैं. हम सऊदी अरब और अल्जीरिया में उनकी उपस्थिति को बहुत याद करेंगे’. Halfway into our delegation’s tour, Shri @ghulamnazad has had to be admitted to hospital. He is stable, under medical supervision, and will be undergoing some tests and procedures . His contributions to the meetings in Bahrain and Kuwait were highly impactful, and he is pic.twitter.com/73CL9nqQGl — Baijayant Jay Panda (@PandaJay) May 27, 2025 गुलाम नबी आजाद ने जताया आभार वहीं गुलाम नबी आजाद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि कुवैत में भीषण गर्मी के कारण मेरे स्वास्थ्य पर असर पड़ने के बावजूद, ईश्वर की कृपा से मैं ठीक हूं. सभी टेस्ट के नतीजे सामान्य हैं. आपकी चिंता और प्रार्थनाओं के लिए सभी का धन्यवाद. यह वास्तव में मेरे लिए बहुत मायने रखता है.’ Blessed to share that despite the extreme heat in Kuwait affecting my health, by Gods grace Im doing fine and recovering well. All test results are normal. Thank you all for your concern and prayers — it truly means a lot! — Ghulam Nabi Azad (@ghulamnazad) May 27, 2025 प्रतिनिधिमंडल में ये लोग शामिल बैजयंत पांडा के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा सांसद फांगनोन कोन्याक, भाजपा सांसद रेखा शर्मा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सांसद असदुद्दीन ओवैसी, भाजपा सांसद सतनाम सिंह संधू और भारतीय राजनयिक हर्ष श्रृंगला शामिल हैं. 23 मई को बहरीन और 25 मई को कुवैत का दौरा पांडा और 76 साल के आजाद उन सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक में शामिल हैं जिन्हें भारत ने अलग-अलग देशों में भेजा है. इन प्रतिनिधिमंडलों का काम आतंकवाद के प्रति भारत की प्रतिक्रिया के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत कराना है. प्रतिनिधिमंडल ने 23 मई को बहरीन और 25 मई को कुवैत का दौरा किया, जहां आजाद ने दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठकों में भाग लिया. ‘बैठकों में आजाद का योगदान अत्यंत प्रभावशाली’ पांडा ने कहा कि बहरीन और कुवैत में हुई बैठकों में आजाद का योगदान अत्यंत प्रभावशाली था, और उनके बीमार हो जाने से वह मायूस हैं. मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल के साथ सऊदी की राजधानी पहुंचे पांडा ने कहा, ‘सऊदी अरब और अल्जीरिया में उनकी उपस्थिति हमें बहुत खलेगी.इस यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राजनीतिक व्यक्तियों, सरकारी अधिकारियों, विचारकों और भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ बातचीत करेगा. कांग्रेस ने आजाद के स्वास्थ्य पर जताई चिंता इस बीच कांग्रेस ने आजाद के अस्पताल में भर्ती होने पर चिंता व्यक्त की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आजाद का नाम लिए बगैर सोशल मीडिया पर कहा ‘यह जानकर चिंता हुई कि पाकिस्तानी आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को मजबूत करने के लिए भेजे गए उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में से एक को कुवैत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है’ आजाद लंबे वक्त तक कांग्रेस में रहे थे और उन्होंने 2022 में कांग्रेस को छोड़कर अपनी डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी बना ली थी.

जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का नोटिस, 208 सांसदों ने जताया अविश्वास। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। दिल्ली में मौजूद उनके आवास से जली हुई नकदी के बंडल मिलने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को उनके खिलाफ नोटिस सौंपे हैं। यशवंत वर्मा को इस विवाद के बाद दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया है।

संसद में कितने सांसदों ने दिए नोटिस

लोकसभा में 145 सांसदों ने एक साथ मिलकर न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी, भाजपा के रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और के सुरेश, एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले, डीएमके के टीआर बालू, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं।

राज्यसभा में 63 सांसदों ने दिया नोटिस

राज्यसभा में भी 63 सांसदों ने यही मांग उठाते हुए नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि आम आदमी पार्टी और विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद भले ही सोमवार को मौजूद नहीं थे, लेकिन वे भी इस मुद्दे पर साथ हैं और जल्द ही अपने हस्ताक्षर जमा करेंगे।

क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?

न्यायाधीश को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत प्रक्रिया तय की गई है। लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। अगर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति दोनों नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो एक जांच समिति बनाई जाती है। इस समिति में एक वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट जज, एक हाई कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं। यह समिति तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट संसद को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर संसद में चर्चा होगी और फिर मतदान के बाद निर्णय लिया जाएगा।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर क्या हैं आरोप?

हाल ही में दिल्ली में मौजूद उनके आवास से जले हुए नोट बरामद हुए थे। न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस कमरे में नकदी मिली, उस पर जज यशवंत वर्मा और उनके परिवार का सीधा या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था। इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया है।

पहले भी हुआ था ऐसा- कांग्रेस

वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि इससे पहले भी 13 दिसंबर 2024 को न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने के लिए राज्यसभा में ऐसा ही नोटिस दिया गया था।

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