इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह
इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अत्यंत दुर्लभ और सख्त कदम उठाते हुए केंद्र सरकार इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस वर्मा द्वारा पिछले दिनों दिए गए इस्तीफे को सरकार ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है। दावा किया जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र में संसद के भीतर उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा करा सकती है।
जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच कर रही विशेष तीन सदस्यीय समिति ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप दी है। सरकार इस मामले को तार्किक अंत तक ले जाकर भविष्य के लिए एक कड़ा और सख्त संदेश देना चाहती है।
बंगले में लगी आग और मिले जले हुए नोट: क्या है पूरा मामला?
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इस ऐतिहासिक कार्रवाई की शुरुआत पिछले साल हुई एक अजीबोगरीब घटना से हुई थी:
- स्टोर रूम में मिला कैश: 14 मार्च की रात को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को बंगले के एक स्पेशल स्टोर रूम से भारी मात्रा में आधे जले हुए नोट (कैश) बरामद हुए।
- CJI की आंतरिक जांच: उस वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली हाई कोर्ट में कार्यरत थे। मामला सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना द्वारा गठित एक आंतरिक समिति ने पाया कि जिस स्टोर रूम में भारी मात्रा में कैश छिपाया गया था, उस पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जस्टिस वर्मा का ही नियंत्रण था। इसके बाद उन्हें उनके मूल कैडर (इलाहाबाद हाई कोर्ट) वापस भेज दिया गया था।
200 से अधिक सांसदों ने किए थे हस्ताक्षर, स्पीकर ने बनाई थी समिति
इस भ्रष्टाचार मामले को लेकर जुलाई 2025 में संसद के भीतर भारी बवाल हुआ था, जहाँ 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त को एक 3 सदस्यीय न्यायाधीश जांच समिति का गठन किया था। इसी समिति ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट स्पीकर को सौंपी है, जिसे जुलाई के तीसरे हफ्ते में शुरू होने वाले मॉनसून सत्र में संसद के दोनों सदनों पटल पर रखा जाएगा।इस्तीफे के बाद भी नहीं बचेंगे जस्टिस यशवंत वर्मा-सरकार संसद के मॉनसून सत्र में लाएगी महाभियोग; ये है वजह
क्या इस्तीफे के बाद भी चल सकता है महाभियोग?
संसद द्वारा बर्खास्त किए जाने और बदनामी के डर से जस्टिस यशवंत वर्मा ने पिछले दिनों अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, ताकि उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही रुक सके। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उनका कार्यकाल 5 जनवरी, 2031 तक था।
पारदर्शिता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता: हालांकि, सरकार से जुड़े जानकारों का कहना है कि महज इस्तीफा दे देने से भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले को रफा-दफा नहीं किया जा सकता। सरकार न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति दिखाना चाहती है। यही वजह है कि इस्तीफा स्वीकार करने के बजाय संसद से महाभियोग पारित कराने की तैयारी है। दूसरी तरफ, विपक्ष भी इस पूरे मामले पर पैनी नजर रखे हुए है और मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर संसद के भीतर तीखी बहस होने के पूरे आसार हैं।

