राम मंदिर चंदा विवाद में SIT की बड़ी कार्रवाई; 40 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, हिरासत में कई संदिग्ध
अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे और चंदे में कथित चोरी का मामला अब बेहद तूल पकड़ चुका है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के गंभीर आरोपों के बाद इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है। 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आए इस सियासी भूचाल को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आनन-फानन में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।
एसआईटी की टीम ने अयोध्या में डेरा डाल दिया है और आज यानी मंगलवार को भी राम मंदिर परिसर में लोगों से पूछताछ और गहन जांच की जा रही है।
3 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल SIT टीम; 40 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने बेहद वरिष्ठ अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। इस तीन सदस्यीय एसआईटी टीम में शामिल हैं:
-
विजय विश्वास पंत (वरिष्ठ IPS अधिकारी)
-
एस. किरण (IPS अधिकारी)
-
नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग)
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और सोमवार को मंदिर प्रशासन व सुरक्षा से जुड़े 40 से ज्यादा लोगों से कड़ी पूछताछ की गई है। एसआईटी जल्द ही अपनी गोपनीय रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपेगी।
‘चंपत राय का मतलब ही है चंपत हो जाना…’ संतों के तीखे तेवर
इस विवाद पर देश के बड़े संतों और शंकराचार्यों की बेहद तीखी और बड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं:
-
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती: उन्होंने सबसे विस्फोटक बयान देते हुए कहा, “चोरी हुई है, यह बात वहीं (अंदर) से निकलकर आई है। यह कोई आज की बात नहीं है, बल्कि शिलापूजन के समय से ही चोरी हो रही है। दो-दो मिनट में लाख-लाख रुपये के प्लॉट करोड़ के हो जाते थे। ‘चम्प’ एक धातु है जिससे ‘चंपत’ शब्द बना है और चंपत का मतलब होता है— लेकर भाग जाना। वे चंपत हो गए, लेकर भाग गए।”
-
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज (द्वारका शारदा पीठ): उन्होंने सीधे मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा, “ऐसी घटनाओं का मूल कारण यह है कि जिन लोगों को धर्म का ज्ञान नहीं है, उन्हें धार्मिक संस्थानों की जिम्मेदारी दे दी जाती है। मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े लोगों में धार्मिकता और ईश्वर का भय होना जरूरी है। सरकार को मंदिरों के धन को अन्य कार्यों में खर्च करने का कोई अधिकार नहीं है।”
-
महंत कमल नयन दास (उत्तराधिकारी, महंत नृत्य गोपाल दास): उन्होंने कहा, “इस विवाद से मंदिर की बदनामी हो रही है, इसलिए मामले की न्यायिक जांच हो। जिसकी कभी साइकिल पर चलने की औकात नहीं थी, आज उनकी बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी हैं। जिसका भी नाम आए, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हमें सीएम योगी पर पूरा भरोसा है।”
-
स्वामी चिदानंद सरस्वती (अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन): उन्होंने सरकार का बचाव करते हुए कहा, “राम मंदिर आस्था का विषय है, अफवाहों का नहीं। मुझे खुशी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एसआईटी जांच बैठा दी है।”
अखिलेश यादव का दावा और ट्रस्ट की सफाई
इस पूरे विवाद की चिंगारी सपा प्रमुख अखिलेश यादव के उस बयान से भड़की, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब-किताब साफ नहीं है और बड़ी राशि गायब हुई है।
इस राजनीतिक हमले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चंपत राय का कहना है कि मंदिर का एक-एक पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और सभी वित्तीय लेन-देन बेहद पारदर्शी (Transparent) तरीके से डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से हो रहे हैं, इसलिए चोरी के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
