Transgender Persons Act 2026: ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम-4 हाई कोर्ट्स की कार्यवाही पर लगाई रोक; अब खुद SC करेगा फैसला

Transgender Persons Act 2026: ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम-4 हाई कोर्ट्स की कार्यवाही पर लगाई रोक; अब खुद SC करेगा फैसला

नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2026’ की संवैधानिक वैधता को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अगुवाई वाली बेंच ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजस्थान, कर्नाटक, केरल और दिल्ली हाई कोर्ट में इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर चल रही कार्यवाही पर तुरंत रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट अब इन सभी मामलों को एक साथ जोड़कर या तो किसी एक हाई कोर्ट को सौंपेगा या फिर देश की शीर्ष अदालत खुद इस संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर अंतिम फैसला सुनाएगी।

 क्यों रुकी हाई कोर्ट्स की सुनवाई? क्या है पूरा मामला?

दरअसल, केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक ट्रांसफर पिटीशन (स्थानांतरण याचिका) दायर की गई थी। सरकार की मांग थी कि अलग-अलग राज्यों के हाई कोर्ट्स में दायर याचिकाओं को एक जगह यानी दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए, ताकि अलग-अलग अदालतों की विरोधाभासी राय के बजाय एक स्पष्ट फैसला आ सके। Transgender Persons Act 2026: ट्रांसजेंडर संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम-4 हाई कोर्ट्स की कार्यवाही पर लगाई रोक; अब खुद SC करेगा फैसला

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि चूंकि केंद्र के इस नए कानून की संवैधानिक वैधता को ही सीधी चुनौती दी गई है, इसलिए इस पर गहराई से विचार करना जरूरी है।

 “अलग-अलग राय से बेहतर, हम खुद करेंगे फैसला” – CJI

सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में जजों और वकीलों के बीच दिलचस्प और तीखी बहस देखने को मिली:

‘NALSA के फैसले को कमजोर करता है नया संशोधन, कोई मेडिकल आधार नहीं’

अदालत के सामने दिल्ली हाई कोर्ट में मुख्य याचिका दायर करने वाले डॉ. चंद्रेश जैन ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने इस नए संशोधन कानून पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:

दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से इस गंभीर विषय पर औपचारिक नोटिस जारी करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह माननीय जजों को इस संवेदनशील मामले को तीन जजों की बड़ी बेंच के सामने रखने के लिए सहमत कर सकते हैं, क्योंकि हाई कोर्ट्स के लिए पूर्व में दिए गए नालसा फैसले के उलट कोई भी राय बनाना व्यावहारिक रूप से मुश्किल होगा।

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