MP पटवारी तबादला: ‘डिजिटल कड़ाई’ के बीच प्रशासनिक फेरबदल, जानें किसे मिली राहत और किसे झटका

MP पटवारी तबादला: 'डिजिटल कड़ाई' के बीच प्रशासनिक फेरबदल, जानें किसे मिली राहत और किसे झटका

MP पटवारी तबादला: ‘डिजिटल कड़ाई’ के बीच प्रशासनिक फेरबदल, जानें किसे मिली राहत और किसे झटका

भोपाल: मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए राजस्व विभाग ने कमर कस ली है। वर्ष 2026 की नई तबादला नीति के तहत प्रदेश भर में पटवारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है। इस बार का फेरबदल केवल एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे ‘डिजिटल गवर्नेंस’ और पारदर्शिता का एक बड़ा संदेश है।

​आइए समझते हैं इस नए प्रशासनिक फेरबदल के मायने और इसके मुख्य बिंदु:

​’मैनुअल एप्रोच’ खत्म, 100% ऑनलाइन व्यवस्था

​इस बार के तबादलों में सबसे बड़ी बात यह रही कि मंत्रियों या विधायकों की ‘सिफारिशी चिट्ठियों’ की जगह पूरी तरह डिजिटल एल्गोरिदम और ऑनलाइन आवेदनों को प्राथमिकता दी गई है। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब ऑफलाइन या बैकडेट में कोई भी ट्रांसफर आर्डर मान्य नहीं होगा।

​ किसे मिली प्राथमिकता? (राहत की खबर)

​प्रशासनिक कड़ाई के बीच मानवीय आधार पर कई पटवारियों को बड़ी राहत दी गई है:

​दागी और नए पटवारियों को ‘नो एंट्री’ (झटका)

​इस नीति में कुछ कड़े प्रावधान भी शामिल हैं:

​ 15 दिन की ‘डेडलाइन’

​आदेश जारी होने के साथ ही राजस्व विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए हैं। ट्रांसफर किए गए पटवारियों को अगले 15 दिनों के भीतर अपने वर्तमान हल्के (क्षेत्र) का प्रभार सौंपकर नए जिले/तहसील में जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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