Wednesday, April 29, 2026
Latest:
Latest

जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का नोटिस, 208 सांसदों ने जताया अविश्वास

जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का नोटिस, 208 सांसदों ने जताया अविश्वास। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। दिल्ली में मौजूद उनके आवास से जली हुई नकदी के बंडल मिलने के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को उनके खिलाफ नोटिस सौंपे हैं। यशवंत वर्मा को इस विवाद के बाद दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया है।

संसद में कितने सांसदों ने दिए नोटिस

लोकसभा में 145 सांसदों ने एक साथ मिलकर न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी, भाजपा के रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और के सुरेश, एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले, डीएमके के टीआर बालू, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन और आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर जैसे कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल हैं।

राज्यसभा में 63 सांसदों ने दिया नोटिस

राज्यसभा में भी 63 सांसदों ने यही मांग उठाते हुए नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि आम आदमी पार्टी और विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसदों ने भी इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सांसद भले ही सोमवार को मौजूद नहीं थे, लेकिन वे भी इस मुद्दे पर साथ हैं और जल्द ही अपने हस्ताक्षर जमा करेंगे।

क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?

न्यायाधीश को हटाने के लिए संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत प्रक्रिया तय की गई है। लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। अगर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति दोनों नोटिस को स्वीकार करते हैं, तो एक जांच समिति बनाई जाती है। इस समिति में एक वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट जज, एक हाई कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश और एक प्रख्यात कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं। यह समिति तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट संसद को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर संसद में चर्चा होगी और फिर मतदान के बाद निर्णय लिया जाएगा।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर क्या हैं आरोप?

हाल ही में दिल्ली में मौजूद उनके आवास से जले हुए नोट बरामद हुए थे। न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। लेकिन जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस कमरे में नकदी मिली, उस पर जज यशवंत वर्मा और उनके परिवार का सीधा या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था। इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया है।

पहले भी हुआ था ऐसा- कांग्रेस

वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बताया कि इससे पहले भी 13 दिसंबर 2024 को न्यायमूर्ति शेखर यादव को हटाने के लिए राज्यसभा में ऐसा ही नोटिस दिया गया था।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि