हमीदिया की नर्सों का ‘दर्द’: 12 घंटे ड्यूटी पर पानी पीने तक की फुर्सत नहीं; 1 नर्स पर 30 मरीजों का बोझ, नियमों और हकीकत के बीच पिस रही Sister
हमीदिया की नर्सों का ‘दर्द’: 12 घंटे ड्यूटी पर पानी पीने तक की फुर्सत नहीं; 1 नर्स पर 30 मरीजों का बोझ, नियमों और हकीकत के बीच पिस रही Sister। आज जब पूरी दुनिया ‘नर्सेस डे’ मना रही है, तब भोपाल के हमीदिया अस्पताल की नर्सें भारी वर्कलोड और थकावट के बीच मरीजों की सेवा में जुटी हैं। अस्पताल की नर्स जया बरई की कहानी सिस्टम की उस कड़वी हकीकत को बयां करती है, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।
जया बरई की ड्यूटी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक यानी पूरे 12 घंटे की होती है। आईसीयू (ICU) जैसे संवेदनशील वार्ड में तैनात जया बताती हैं कि उनकी पानी की बोतल टेबल पर धरी की धरी रह जाती है। मेडिकल इमरजेंसी में काम करते हुए समय का पता ही नहीं चलता। जब ड्यूटी खत्म होने वाली होती है, तब याद आता है कि बोतल तो खोली ही नहीं। जया की आवाज में थकान और सिस्टम के प्रति लाचारी साफ झलकती है।
नियम बनाम हकीकत: आंकड़ों का खौफनाक सच
हमीदिया में करीब 2000 नर्सें हैं, लेकिन मरीजों के भारी दबाव के सामने यह संख्या ऊँट के मुँह में जीरे के समान है।
स्थिति
सरकारी नियम (Protocol)
हमीदिया की हकीकत
जनरल वार्ड
10 मरीज पर 1 नर्स
30 मरीज पर 1 नर्स
ICU (कोमा में मरीज)
1 मरीज पर 1 नर्स
भारी कमी
ICU (होश में मरीज)
2 मरीज पर 1 नर्स
भारी कमी
मरीजों की जान और नर्सों की सेहत दांव पर
एक नर्स पर 30 मरीजों की जिम्मेदारी होने का मतलब है कि वे चाहकर भी हर मरीज को पर्याप्त समय और देखभाल नहीं दे पातीं। लगातार 12 घंटे खड़े रहकर ड्यूटी करने से नर्सों में कमर दर्द, पैरों में सूजन और मानसिक तनाव जैसी बीमारियाँ घर कर रही हैं। क्या सिर्फ साल में एक दिन ‘नर्सेस डे’ मनाकर हम उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं? हमीदिया जैसे बड़े मेडिकल संस्थानों में जब तक स्टाफ की भर्ती नियमों के अनुसार नहीं होगी, तब तक न तो मरीजों को बेहतर इलाज मिलेगा और न ही सेवा करने वाले ये ‘हाथ’ सुरक्षित रहेंगे।