UP एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार: अब कैब वाले नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किराया; ड्राइवर ने बुकिंग कैंसिल की तो कटेगा जेब से पैसा, जानें नए नियम

UP एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार: अब कैब वाले नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किराया; ड्राइवर ने बुकिंग कैंसिल की तो कटेगा जेब से पैसा, जानें नए नियम

UP एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार: अब कैब वाले नहीं वसूल पाएंगे मनमाना किराया; ड्राइवर ने बुकिंग कैंसिल की तो कटेगा जेब से पैसा, जानें नए नियम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ओला, उबर और इनड्राइव जैसी कैब सेवाओं (Aggregators) का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। परिवहन विभाग ने राज्य की नई ‘एग्रीगेटर पॉलिसी’ का ड्राफ्ट पूरी तरह तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू कर दिया जाएगा

इस पॉलिसी के लागू होने के बाद कैब संचालक यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगे। साथ ही, पीक आवर्स (ज्यादा मांग के समय) के नाम पर होने वाली अंधाधुंध लूट और ड्राइवरों द्वारा बार-बार बुकिंग कैंसिल करने की मनमानी पर भी पूरी तरह लगाम लग जाएगी

अब पीक आवर में भी नहीं बढ़ेगा भारी किराया

परिवहन विभाग ने कैब संचालकों के लिए एक सख्त दायरा तय कर दिया है:

बुकिंग कैंसिलेशन और देरी पर लगेगा तगड़ा जुर्माना

यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या ‘ड्राइवर द्वारा ट्रिप कैंसिल करना’ और ‘देर से आना’ होती है। नई पॉलिसी में इसके लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं:

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एग्रीगेटर्स के लिए लाइसेंस अनिवार्य, सुरक्षा के कड़े नियम

डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीए) सगीर अहमद अंसारी के मुताबिक, इस पॉलिसी में यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत का खास ख्याल रखा गया है। अब राज्य में कैब संचालित करने के लिए कंपनियों को सरकार से बकायदा लाइसेंस लेना होगा:

क्यों पड़ी जरूरत? उत्तर प्रदेश में अब तक कोई स्पष्ट एग्रीगेटर पॉलिसी न होने के कारण ये कैब कंपनियां और इनके चालक पूरी तरह बेलगाम हो चुके थे। किराए से लेकर कैंसिलेशन तक, हर मामले में यात्रियों का शोषण हो रहा था। परिवहन विभाग ने अब इस पॉलिसी का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है और उम्मीद है कि अगले कुछ ही दिनों में यह पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगी।

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