78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ खोलेगा सिंधिया राजघराने की संपत्ति के राज- 1948 के ऐतिहासिक दस्तावेज से तय होंगी निजी जायदादें
78 साल पुराना 'द कोवेनेंट' खोलेगा सिंधिया राजघराने की संपत्ति के राज- 1948 के ऐतिहासिक दस्तावेज से तय होंगी निजी जायदादें
78 साल पुराना 'द कोवेनेंट' खोलेगा सिंधिया राजघराने की संपत्ति के राज- 1948 के ऐतिहासिक दस्तावेज से तय होंगी निजी जायदादें
78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ खोलेगा सिंधिया राजघराने की संपत्ति के राज- 1948 के ऐतिहासिक दस्तावेज से तय होंगी निजी जायदादें
ग्वालियर: मध्य भारत (वर्तमान मध्य प्रदेश) के गठन से जुड़ा 78 साल पुराना ऐतिहासिक दस्तावेज ‘द कोवेनेंट’ (अनुबंध पत्र) सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद की कानूनी कार्यवाही में एक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। यह दस्तावेज स्वतंत्रता के बाद भारतीय रियासतों के भारत संघ में विलय और एकीकरण से जुड़ा एक ऐतिहासिक अनुबंध है।
13 अगस्त, 1948 को भारत सरकार और तत्कालीन मध्य भारत सरकार के बीच हुए इस समझौते में तत्कालीन महाराजा की निजी और सरकारी संपत्तियों का स्पष्ट रूप से बंटवारा किया गया था।
‘द कोवेनेंट’ के तहत कौन-कौन सी संपत्तियां थीं ‘निजी’?
1948 के इस अनुबंध पत्र के अनुसार, सिंधिया राजघराने की कई ऐतिहासिक और भव्य संपत्तियों को महाराजा की निजी संपत्ति (Private Property) घोषित किया गया था:
ग्वालियर: भव्य ‘जय विलास पैलेस’, साख्या विलास और सुसेरा कोठी।
शिवपुरी: माधव विलास पैलेस और जार्ज कैसल कोठी।
अन्य शहर: दिल्ली स्थित ‘दिल्ली कोठी’ (राजपुर रोड) और पुणे का ‘पद्मा विलास’। 78 साल पुराना ‘द कोवेनेंट’ खोलेगा सिंधिया राजघराने की संपत्ति के राज- 1948 के ऐतिहासिक दस्तावेज से तय होंगी निजी जायदादें
कानूनी मामलों के जानकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति विवाद के निपटारे और कानूनी दावों की जांच में 13 अगस्त 1948 का यह ‘कोवेनेंट’ दस्तावेज सबसे निर्णायक भूमिका निभाएगा।