Tech Leak: iPhone 18 Pro में पहली बार मिलेगा ‘बैटरी’ का झटका- सिम कार्ड देखकर एपल तय करेगा आपके फोन का बैकअप; लीक में खुला बड़ा राज़

Tech Leak: iPhone 18 Pro में पहली बार मिलेगा 'बैटरी' का झटका- सिम कार्ड देखकर एपल तय करेगा आपके फोन का बैकअप; लीक में खुला बड़ा राज़

कैलिफोर्निया/नई दिल्ली: एपल लवर्स के लिए एक बेहद हैरान करने वाली खबर है। भले ही अभी iPhone 16 और 17 की चर्चाएं बाजार में गर्म हों, लेकिन कंपनी की भविष्य की सीरीज iPhone 18 Pro को लेकर चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो (Weibo) पर एक ऐसा लीक आया है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री को चौंका दिया है।

मशहूर टिपस्टर ‘डिजिटल चैट स्टेशन’ (Digital Chat Station) और ‘आइस यूनिवर्स’ (Ice Universe) के मुताबिक, एपल अपने अपकमिंग iPhone 18 Pro को दो अलग-अलग बैटरी कैपेसिटी (Options) के साथ टेस्ट कर रहा है। सबसे मजेदार बात यह है कि बैटरी का यह साइज इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके देश में फिजिकल सिम कार्ड चलता है या ई-सिम (eSIM)।

सिम कार्ड का स्लॉट तय करेगा आपकी बैटरी का साइज!

लीक के अनुसार, एपल फोन के अंदर की जगह (Internal Space) को मैनेज करने के लिए एक अनोखा विधिक व तकनीकी प्रयोग कर रहा है:

iPhone 18 Pro Max की बैटरी में भी होगा भारी अंतर

लीक में सिर्फ प्रो मॉडल ही नहीं, बल्कि सबसे महंगे और प्रीमियम मॉडल iPhone 18 Pro Max की बैटरी डिटेल्स भी लीक हो गई हैं:

यानी साफ है कि आने वाले समय में बड़ी बैटरी का फायदा सिर्फ उन्हीं देशों के यूजर्स को मिलेगा जहां फिजिकल सिम का झंझट पूरी तरह खत्म हो चुका होगा।

2nm की सुपरफास्ट चिप और वेरिएबल अपर्चर कैमरा

बैटरी के अलावा, लीक रिपोर्ट्स ने इस सुपर-फोन के दो अन्य बड़े हार्डवेयर अपग्रेड्स से भी पर्दा उठाया है:

  1. A20 Pro चिपसेट: यह फोन एपल के सबसे एडवांस प्रोसेसर A20 प्रो से लैस होगा, जो दुनिया की सबसे बारीक 2nm (नैनोमीटर) प्रोसेस पर तैयार किया जा रहा है। यह फोन को सुपरफास्ट और बेहद पावर-एफिशिएंट बनाएगा।

  2. वेरिएबल अपर्चर कैमरा: प्रो वेरिएंट के प्रोटोटाइप (Prototype) में पहली बार 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा सेंसर देखा गया है, जो वेरिएबल अपर्चर (Variable Aperture) सिस्टम के साथ आएगा। यानी डीएसएलआर (DSLR) कैमरे की तरह यूजर खुद तय कर सकेंगे कि लेंस के अंदर कितनी रोशनी जानी चाहिए।

💰 क्या महंगे होंगे नए आईफोन? इन सभी अत्याधुनिक हार्डवेयर अपग्रेड्स और दो अलग-अलग बैटरी मॉडल्स की टेस्टिंग के कारण फोन की प्रोडक्शन कॉस्ट (बनाने की लागत) काफी बढ़ सकती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एपल इस बढ़े हुए खर्च का बोझ खुद उठाएगा या हमेशा की तरह कीमत बढ़ाकर इसका सीधा भार ग्राहकों की जेब पर डालेगा।

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