भोपाल PWD का ‘VIP’ मानसून विन्यास: VIP सड़कों की मरम्मत के लिए 40 लाख का बजट; आम जनता गड्ढों में, 19 जून के बाद खुलेगा टेंडर
भोपाल PWD का 'VIP' मानसून विन्यास: VIP सड़कों की मरम्मत के लिए 40 लाख का बजट; आम जनता गड्ढों में, 19 जून के बाद खुलेगा टेंडर

भोपाल PWD का ‘VIP’ मानसून विन्यास: VIP सड़कों की मरम्मत के लिए 40 लाख का बजट; आम जनता गड्ढों में, 19 जून के बाद खुलेगा टेंडर
भोपाल: राजधानी भोपाल में मानसून की दस्तक से पहले सड़कों के रखरखाव और पैचवर्क (G गड्ढे भरने का काम) को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक बड़ी लापरवाही और वीआईपी-मानसिकता (VIP Culture) उजागर हुई है। मानसून सिर पर है, लेकिन पीडब्ल्यूडी इस बार भी आम जनता की व्यस्त सड़कों को भगवान भरोसे छोड़कर सिर्फ मंत्रियों और आला अफसरों के वीआईपी इलाकों को चमकाने में जुट गया है।
इतना ही नहीं, कागजी विन्यास और टेंडर प्रक्रिया की सुस्ती का आलम यह है कि जब तक सड़कों को सुधारने वाली निर्माण एजेंसी का चयन होगा, तब तक मानसून राजधानी में पूरी तरह प्रवेश कर चुका होगा।
40 लाख का बजट, लेकिन प्राथमिकता में सिर्फ ‘खास’ इलाके
जानकारी के अनुसार, पीडब्ल्यूडी ने मेंटेनेंस डिवीजन क्रमांक-1 के अंतर्गत आने वाले वीआईपी मार्गों की सूरत बदलने के लिए 40 लाख रुपये का विधिक प्रावधान किया है। विडंबना यह है कि इस पूरे बजट का इस्तेमाल सिर्फ उन रास्तों को पैचवर्क के जरिए दुरुस्त करने में किया जाएगा जहां सरकार के मंत्री और रसूखदार प्रशासनिक अधिकारी रहते हैं।
इन वीआईपी क्षेत्रों की चमकेगी किस्मत:
- 74 बंगला (स्वामी विवेकानंद परिसर – मंत्रियों का गढ़)
- राजभवन मार्ग (महामहिम राज्यपाल का परिसर)
- बाणगंगा और श्यामला हिल्स (मुख्यमंत्री निवास व अन्य वीआईपी आवास)
- विभिन्न शासकीय आवासीय परिसर (सीनियर आईएएस/आईपीएस के विन्यास)
‘अब पछताए होत क्या…’ जब मानसून के बाद तय होगी एजेंसी
पीडब्ल्यूडी के इस मेंटेनेंस कार्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता इसकी टाइमिंग (समय-सारणी) को लेकर है। विभाग ने पैचवर्क के काम के लिए टेंडर तो जारी कर दिया है, लेकिन विधिक विन्यास के अनुसार इस टेंडर की एजेंसी का अंतिम चयन 19 जून के बाद होगा।
जनता का सवाल: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, जून के दूसरे सप्ताह तक मानसून राजधानी भोपाल में दस्तक दे देता है। ऐसे में जब 19 जून के बाद ठेकेदार तय होगा, तब तक लगातार होने वाली बारिश के बीच सड़कों पर डामरीकरण या पैचवर्क का काम करना तकनीकी रूप से असंभव होगा। साफ है कि मानसून से पहले कागजी खानापूर्ति करने के चक्कर में सरकारी पैसे की विधिक बर्बादी की तैयारी की जा रही है।








