सोलर पावर से जगमगाया उत्तरी रेलवे- 2 महीने में 34 लाख यूनिट बिजली पैदा कर बनाया नया रिकॉर्ड
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे को हाई-टेक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। हाईस्पीड ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों के कायाकल्प के बाद अब रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। उत्तरी रेलवे (Northern Railway) ने अपने रेलवे स्टेशनों और प्रशासनिक भवनों की छतों पर बड़े पैमाने पर सोलर पैनल स्थापित कर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है।
रेलवे की इस पहल से न केवल बिजली बिलों में करोड़ों रुपये की बचत हो रही है, बल्कि यह देश के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन (Net-Zero Carbon Emission) लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम योगदान दे रहा है।
खबर के प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
-
28.35 मेगावाट हुई कुल क्षमता: उत्तरी रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल और मई 2026) में 2.2 मेगावाट क्षमता के नए रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए हैं, जिससे कुल सौर क्षमता बढ़कर 28.35 मेगावाट हो गई है।
-
2.2 करोड़ रुपये की सीधी बचत: केवल दो महीनों में 34 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया, जिससे बिजली बिल में करीब 2.2 करोड़ रुपये की भारी बचत दर्ज की गई है।
-
पर्यावरण को बड़ी राहत: इस स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से करीब 2,820 टन CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) के उत्सर्जन को रोका गया है। सोलर पावर से जगमगाया उत्तरी रेलवे- 2 महीने में 34 लाख यूनिट बिजली पैदा कर बनाया नया रिकॉर्ड
अब ट्रेन के कोच भी बन रहे हैं ‘सोलर स्मार्ट’
रेलवे का यह अभियान केवल स्टेशनों और भवनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब चलती ट्रेनों को भी सोलर पावर से लैस किया जा रहा है।
-
प्रयागराज मंडल की अनूठी पहल: उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल ने एक विशेष सोलर पावर्ड ट्रेन कोच तैयार किया है।
-
21 सोलर पैनल से लैस कोच: इस कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता के कुल 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं।
-
सालाना 13,400 यूनिट बिजली उत्पादन: इन पैनलों से उत्पन्न होने वाली बिजली का उपयोग कोच के अंदर लगे पंखों, लाइटों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलाने के लिए किया जाएगा।
-
सालाना बचत का आंकड़ा: दावा किया जा रहा है कि एक सोलर कोच से हर साल लगभग 2.80 लाख रुपये की बिजली बचत होगी और सालाना 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
क्यों अहम है यह कदम?
पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होने से रेलवे का परिचालन खर्च (Operational Cost) घट रहा है। इसके साथ ही हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा मिलने से भारतीय रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा ‘ग्रीन रेलवे नेटवर्क’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
