7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी तेल: गुजरात-ओडिशा तट पर लगे सुपरटैंकर, सप्लाई में बड़ी राहत। करीब सात वर्षों के अंतराल के बाद भारत में ईरानी कच्चे तेल की वापसी हुई है। ईरान से तेल लेकर आए दो बड़े सुपरटैंकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर पहुंच चुके हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई दबाव के बीच राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
7 साल बाद भारत पहुंचा ईरानी तेल: गुजरात-ओडिशा तट पर लगे सुपरटैंकर, सप्लाई में बड़ी राहत
गुजरात और ओडिशा तट पर पहुंचे टैंकर
शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार:
- ‘फेलिसिटी’ नामक टैंकर गुजरात के सिक्का तट पर पहुंचा
- ‘जया’ टैंकर ओडिशा के पारादीप पोर्ट के पास लंगर डाले हुए है
दोनों टैंकरों में करीब 2-2 मिलियन बैरल कच्चा तेल लदा हुआ है, जिसे ईरान के खर्ग द्वीप से लोड किया गया था।
7 साल बाद पहली खेप क्यों?
भारत में ईरानी तेल की यह पहली खेप है जो करीब 7 साल बाद पहुंची है।
दरअसल, संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल ही में प्रतिबंधों में सीमित समय (30 दिन) की छूट दी थी, जिसके चलते पहले से समुद्र में मौजूद तेल की डिलीवरी संभव हो सकी।
किन कंपनियों को मिल सकता है तेल?
- पारादीप पोर्ट का संचालन Indian Oil Corporation करता है
- सिक्का क्षेत्र में Reliance Industries और Bharat Petroleum की बड़ी मौजूदगी है
हालांकि, इन खेपों के खरीदारों के नाम आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
2019 के बाद बंद हो गया था आयात
अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते मई 2019 से भारत ने ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया था।
2018 में भारत, ईरान से प्रतिदिन करीब 5.18 लाख बैरल तेल खरीदता था, जो कुल आयात का लगभग 11.5% था।
आगे क्या?
- अनुमान है कि समुद्र में करीब 95 मिलियन बैरल ईरानी तेल मौजूद है
- इसमें से लगभग 51 मिलियन बैरल भारत को मिल सकता है
- लेकिन यह छूट 19 अप्रैल तक ही वैध है
बाजार पर क्या असर?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरानी तेल की वापसी से:
- वैश्विक सप्लाई में सुधार हो सकता है
- कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है
यह घटनाक्रम भारत के ऊर्जा सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे तेल आपूर्ति के विकल्प बढ़ेंगे और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

