Historic Moment: राजगढ़-कुरावर के लिए ऐतिहासिक दिन-120 KM/H की तूफानी रफ्तार से दौड़ी ‘सपनों की रेल’, श्यामपुर-कुरावर ट्रैक को कमिश्नर की हरी झंडी – yashbharat.com

Historic Moment: राजगढ़-कुरावर के लिए ऐतिहासिक दिन-120 KM/H की तूफानी रफ्तार से दौड़ी 'सपनों की रेल', श्यामपुर-कुरावर ट्रैक को कमिश्नर की हरी झंडी - yashbharat.com

Historic Moment: राजगढ़-कुरावर के लिए ऐतिहासिक दिन-120 KM/H की तूफानी रफ्तार से दौड़ी ‘सपनों की रेल’, श्यामपुर-कुरावर ट्रैक को कमिश्नर की हरी झंडी – yashbharat.com

राजगढ़: बरसों का लंबा इंतजार, दशकों की उम्मीद और अंचल के लाखों लोगों का वो पुराना सपना… जो अब हकीकत बनकर पटरियों पर पूरी रफ्तार से दौड़ने लगा है। शुक्रवार का दिन राजगढ़, कुरावर और भोपाल-रामगंजमंडी रेल लाइन की राह देख रहे अंचल वासियों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं था। मौका था नवनिर्मित श्यामपुर-कुरावर रेलखंड के 13.70 किलोमीटर लंबे ट्रैक के अंतिम निरीक्षण और हाई-स्पीड ट्रायल (Speed Trial) का।Historic Moment: राजगढ़-कुरावर के लिए ऐतिहासिक दिन-120 KM/H की तूफानी रफ्तार से दौड़ी ‘सपनों की रेल’, श्यामपुर-कुरावर ट्रैक को कमिश्नर की हरी झंडी – yashbharat.com

जब इस नए बिछे ट्रैक पर पहली बार चमचमाती स्पेशल ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से हवा को चीरती हुई गुजरी, तो पटरियों के दोनों ओर खड़े हजारों ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। सुबह से लेकर देर रात तक कुरावर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर नागरिकों का ऐसा हुजूम उमड़ा, मानो कोई बड़ा मेला लगा हो। हर कोई इस ऐतिहासिक पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर रहा था।

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इस ऐतिहासिक कमर्शियल रन और स्पीड ट्रायल से पहले रेलवे की सुरक्षा और गुणवत्ता की सबसे कड़ी परीक्षा हुई, जिसमें यह ट्रैक पूरी तरह पास रहा:

शाम को 120 की स्पीड से दौड़ी ट्रेन, बुजुर्गों की आंखें हुईं नम

दिनभर चले इस मैराथन निरीक्षण के बाद बारी थी सबसे रोमांचक पल यानी ‘स्पीड ट्रायल’ की। शाम ढलते ही कुरावर स्टेशन से स्पेशल ट्रेन अधिकारियों को लेकर वापस श्यामपुर की ओर रवाना हुई।

जैसे ही लोको पायलट ने ट्रेन का एक्सीलेटर खींचा, इंजन की गड़गड़ाहट के साथ ट्रेन 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति को छू गई। हवा को चीरती हुई जब यह ट्रेन स्टेशन से गुजरी, तो वहां मौजूद बुजुर्गों की आंखें खुशी से छलक पड़ीं और युवाओं में एक नया उत्साह तैर गया। अंचल के लोगों के लिए यह सिर्फ एक ट्रेन की रफ्तार नहीं, बल्कि इलाके के आर्थिक और सामाजिक विकास की नई रफ्तार है।

जैसे ही यह 85 किलोमीटर का बचा हुआ काम पूरा हो जाएगा, वैसे ही भोपाल से रामगंजमंडी (कोटा, राजस्थान) का सीधा और सबसे छोटा रेल रूट पूरी तरह शुरू हो जाएगा, जिससे राजस्थान और एमपी के बीच का सफर बेहद आसान हो जाएगा।

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