नई दिल्ली: भारतीय गगन की संप्रभुता को अचूक और अजेय बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय और भारतीय वायुसेना ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठा लिया है। वायुसेना की बहुप्रतीक्षित एमआरएफए (Multi-Role Fighter Aircraft – MRFA) परियोजना के तहत 114 नए अत्याधुनिक 4.5 जनरेशन के लड़ाकू विमानों की खरीद की प्लानिंग अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस बीच सबसे बड़ी खबर यह है कि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह तीन दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे सीधे राफेल विमान बनाने वाली दिग्गज कंपनी ‘डसॉल्ट एविएशन’ (Dassault Aviation) के शीर्ष अधिकारियों और फ्रांसीसी रक्षा नेतृत्व से मुलाकात करेंगे।
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रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने इस ऐतिहासिक सौदे के लिए औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request – LoR) पूरी तरह तैयार कर लिया है, जिसे आने वाले कुछ ही हफ्तों में आधिकारिक तौर पर फ्रांस सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस पूरी मेगा डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये ($39-40 Billion) आंकी जा रही है।
‘मेक इन इंडिया’ का बजेगा डंका: 90 राफेल विमान भारत में ही बनेंगे
इस नए रक्षा सौदे की सबसे खास और अभूतपूर्व बात यह है कि यह पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के तहत संचालित होगा:
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भारत में निर्माण: डील की शर्तों के मुताबिक, कुल 114 विमानों में से 90 राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय रक्षा भागीदार कंपनी के साथ मिलकर भारत में ही इसकी असेंबली लाइन और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी।
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फ्रांस से सीधे उड़ान: बाकी बचे 24 राफेल विमान फ्रांस से सीधे पूरी तरह तैयार (Fly-away condition) हालत में भारतीय वायुसेना को सौंपे जाएंगे।
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50% स्वदेशी कलपुर्जे: भारत में बनने वाले इन 90 राफेल विमानों में करीब 50% पार्ट्स (सामग्री और तकनीक) पूरी तरह स्वदेशी यानी भारतीय होंगे, जिससे देश में एयरोस्पेस इकोसिस्टम और हजारों उच्च-तकनीकी नौकरियों का निर्माण होगा।
नौसेना के लिए अलग से आ रहे हैं 26 ‘राफेल मरीन’
वायुसेना के इस विशालकाय 114 विमानों के बेड़े के अलावा, भारतीय नौसेना (Indian Navy) के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य के लिए भी अलग से 26 राफेल मरीन (Rafale Marine) जेट्स की खरीद प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए दोनों देशों के बीच पिछले साल 28 अप्रैल को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। यानी आने वाले समय में भारत के पास ‘राफेल’ विमानों की एक विशाल और अजेय फ्लीट होगी।
चीन-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ेगा खौफ, स्क्वाड्रन की कमी होगी दूर
भारतीय वायुसेना वर्तमान में 2016 में हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत खरीदे गए 36 राफेल विमानों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। ये विमान इस समय रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दो ठिकानों पर तैनात हैं:
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अंबाला एयरबेस (हरियाणा): पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) पर नजर रखने के लिए।
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हाशिमारा एयरबेस (पश्चिम बंगाल): पूर्वी सीमा (चीन और सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा के लिए।
वायुसेना में स्वीकृत स्क्वाड्रन की संख्या 42 होनी चाहिए, जो इस समय घटकर करीब 31-32 पर आ गई है। ऐसे में 114 नए राफेल विमानों के आने से वायुसेना को 6 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे, जो मिग-21 और पुराने हो रहे लड़ाकू विमानों की विदाई के बाद पैदा हुए शून्य को भरेंगे और भारतीय वायुसेना को एशिया की सबसे मारक हवाई शक्ति बना देंगे।
