संतान न होना तलाक का कानूनी आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या कहता है कानून और मेडिकल साइंस
संतान न होना तलाक का कानूनी आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या कहता है कानून और मेडिकल साइंस
संतान न होना तलाक का कानूनी आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या कहता है कानून और मेडिकल साइंस
पटना: भारतीय समाज में शादी के बाद अक्सर पति-पत्नी पर संतान उत्पत्ति का दबाव बनाया जाता है। बच्चा न होने की स्थिति में ज्यादातर महिलाओं को ही दोषी ठहराया जाता है और कई बार यह विवाद तलाक (Divorce) तक पहुँच जाता है। इसी विषय पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक लैंडमार्क फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल संतान न होना तलाक का वैध या कानूनी आधार नहीं बन सकता।
हिंदू विवाह अधिनियम और पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब तक पत्नी ने पति के साथ क्रूरता (Cruelty), धोखा न दिया हो या हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में वर्णित अन्य वैध आधार साबित न हों, तब तक केवल बच्चा न होने के आधार पर शादी को समाप्त नहीं किया जा सकता।
कानून क्या कहता है? हिंदू विवाह अधिनियम में क्रूरता, व्यभिचार, परित्याग, धर्म परिवर्तन और मानसिक बीमारी जैसे तलाक के आधार तय हैं, लेकिन इसमें कहीं भी संतान न होने का जिक्र नहीं है।
कब बन सकता है मुद्दा? यदि कोई पक्ष शादी से पहले अपनी नपुंसकता (Infertility/Impotency) छिपाता है और दांपत्य संबंध संभव नहीं हो पाता, तो यह धोखाधड़ी का मामला बन सकता है। लेकिन सामान्य परिस्थितियों में संतान न होना तलाक का कारण नहीं है।
क्या केवल महिलाएं जिम्मेदार हैं? क्या कहते हैं आंकड़े?
मेडिकल साइंस (WHO की रिपोर्ट): विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बांझपन के एक-तिहाई मामलों में पुरुष और एक-तिहाई मामलों में महिलाएं जिम्मेदार होती हैं। बाकी मामलों में स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता। अतः केवल महिलाओं को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
NFHS-5 के आंकड़े: भारत में लगभग 10% से 15% विवाहित जोड़े किसी न किसी स्तर पर इनफर्टिलिटी की समस्या से प्रभावित हैं।
सामाजिक उत्पीड़न: सर्वे में सामने आया है कि बच्चे न होने के चलते महिलाओं को रिश्तेदारों के ताने, घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। संतान न होना तलाक का कानूनी आधार नहीं: पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, जानिए क्या कहता है कानून और मेडिकल साइंस
बच्चा न होने पर क्या करें? (डॉक्टरों की सलाह)
दोनों की जांच कराएं: एक-दूसरे को दोष देने के बजाय पति और पत्नी दोनों अपनी मेडिकल जांच करवाएं।
आधुनिक उपचार: IVF, IUI जैसी एडवांस तकनीकों की मदद लें।
काउंसलिंग और गोद लेना: मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलें और जरूरत पड़ने पर बच्चे को गोद (Adoption) लेने के विकल्प पर विचार करें।