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मेट्रो हॉस्पिटल ने शिकायत के बाद वापस किये 21 हजार रुपए

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जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि। मेट्रो हॉस्पिटल में कैशलेस सुविधा प्राप्त सीजीएचएस लाभार्थियों से नकद और अतिरिक्त पैसा लेने की एक नहीं अनेक शिकायतें हैं। समाचार प्रकाशित होने के बाद अनेक पीड़ित अब अखबार के दफ्तर में आकर अपनी पीड़ा बता रहे हैं। सबसे ज्यादा पीड़ित निचले दर्जे के बुजुर्ग हैं। जो कम पढ़े लिखे हैं और जिन्हें नियमों की जानकारी नहीं है। थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला आर जानकारों के संपर्क में आने वाला अपनी शिकायत डायरेक्टर तक पहुंचा देता है। जहां अनेक शिकायतकर्ताओं को अपर निदेशक के हस्तक्षेप से पैसे भी वापस मिले हैं। वो भी किसी को पूरे तो किसी को कम करके दिये गये हैं।

ऐसा ही एक ओर मामला प्रकाश में आया है। सीजीएचएस लाभार्थी ब्रज किशोर मिश्रा ने 30 मई 2015 से 3 जून 2015 तक मेट्रो अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराया था। इस दौरान उससे इलाज और दवा के नाम पर 21 हजार रुपए नकद ले लिये थे। लाभार्थी ने इसकी शिकायत अपर निदेशक को की थी। जिस पर मेट्रो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को 18 सितंबर 2015 को पत्र क्रमांक 526/2015/स्था/केस स्वायो/जबल/8314 जारी किया गया जिसमें निदेशक ने कारण बताओ नोटिस जारी करके पूछा था कि जबकि पेंशनर लाभार्थियों हेतु क्रेडिट पर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने का प्रावधान है तो क्यों नकद राशि वसूली गई। साथ ही पैसे वापस करने के निर्देश दिये तब जाकर शिकायतकर्ता को उसके द्वारा दिये गये पैसे वापस मिले थे।

जानकारी के अनुसार इन्हीं सब अनियमितताओं को लेकर करीब 4 वर्ष पूर्व एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी लेकिन अस्पतालों के इस आश्वासन के बाद कि किसी वृद्घ पेशनर को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें कैशलेस इलाज देने का वादा किया तो सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली। लेकिन याचिका वापस लेने के बाद ही उनका वहीं पुराना रवैया पुनः प्रारंभ हो गया।

हो रही सीबीआई जांच की मांग
निजी अस्पतालों द्वारा सीजीएचएस लाभार्थियों से नकद पैसा लिये जाने को लेकर अनेक बुजुर्ग लाभार्थियों ने तो ऐसे अस्पतालों की सीबीआई जांच की मांग भी कर डाली। उनका तर्क है कि लाभार्थियों के लिए केन्द्र सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय राशि प्रदान करता है। चूंकि मान्यता प्राप्त अस्पताल सरकार धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। एक ही मरीज से इलाज की दोहरी रकम वसूल रहे हैं चूंकि सीबीआई केन्द्र सरकार के पैसों में गड़बड़ी करने वालों पर कार्यवाही करती है लिहाजा मान्यता प्रापत अस्पताल सरकारी पैसों में गड़बड़ी करती है। अतः ऐसे अस्पतालों के मामले सीबीआई को सौंपे जाने चाहिए। इस मामले में अनेक पेंशनर एसोसिएशनों द्वारा केन्द्र सरकार को पत्र लिखा जा रहा है कि ऐसे मामले सीबीआई के सुपुर्द किये जायें।

शैल्बी के दलाल हैं सक्रिय


हाल ही के वर्षों में शहर में स्थापित हई शैल्बी अस्पताल के दलाल सक्रिय हैं। जो सीजीएचएस लाभार्थियों को लुभाते हुए सीजीएचएस डिस्पेंसरियों के आसपास मंडराते हुए कभी भी देखे जा सकते हैं। ये दलाल सीजीएचएस डिस्पेंसरियों में पहुंचकर मरीजों को पर्चे बांटते हुए उन्हें शैल्बी अस्पताल चलने के लिए अच्छी चिकित्सा सुविधा के लूलावने आमंत्रण देते हैं। उल्लेखनीय है कि लाभार्थियों को इलाज के लिए मनपसंद अस्पताल में जाने का विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होती है। ऐसे में परेशान मरीज और उसके परिजन दलालों के झांसे में आ जाते हैं जो बाद में अपने को ठगा हुआ पाते हैं।

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