मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भारी बवाल-पूर्व मंत्री पीपी शर्मा पहुंचे विधानसभा, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोले- ‘अधिकारियों ने पहले ही बना लिया था मन’
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भारी बवाल-पूर्व मंत्री पीपी शर्मा पहुंचे विधानसभा, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोले- 'अधिकारियों ने पहले ही बना लिया था मन'
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भारी बवाल-पूर्व मंत्री पीपी शर्मा पहुंचे विधानसभा, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोले- 'अधिकारियों ने पहले ही बना लिया था मन'मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भारी बवाल-पूर्व मंत्री पीपी शर्मा पहुंचे विधानसभा, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोले- 'अधिकारियों ने पहले ही बना लिया था मन'
भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर मचा राजनीतिक और कानूनी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब कांग्रेस ने पूरी निर्वाचन प्रक्रिया और अधिकारियों की निष्पक्षता पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में भारी बवाल-पूर्व मंत्री पीपी शर्मा पहुंचे विधानसभा, निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल; बोले- ‘अधिकारियों ने पहले ही बना लिया था मन’
गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीपी शर्मा अचानक विधानसभा पहुंचे। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा से मुलाकात कर अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई और एक शिकायती पत्र सौंपा।
“सुबह 9:30 बजे से ही बन रहे थे सर्टिफिकेट”- अधिकारियों पर गंभीर आरोप
विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए पूर्व मंत्री पीपी शर्मा ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
पहले से फिक्स थी तैयारी: विधानसभा सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी सुबह करीब साढ़े नौ बजे से ही निर्वाचन प्रमाण-पत्र (Winning Certificate) तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गए थे।
निष्पक्षता पर संदेह: पीपी शर्मा का तर्क है कि जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तब तक इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही थी? इससे साफ संदेश जाता है कि अधिकारियों ने पहले से ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित करने का मन बना लिया था।
मामला सुप्रीम कोर्ट में, तो फिर इतनी जल्दबाजी क्यों?
कांग्रेस नेता ने साफ किया कि पार्टी इस मामले में चुप बैठने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जिस तरह से निरस्त किया गया है, उसके खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में याचिका दायर की जा चुकी है।
जब मामला देश की सबसे बड़ी अदालत के विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में निर्वाचन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में इतनी जल्दबाजी दिखाना पूरी तरह अनुचित और संदेहास्पद है। कांग्रेस अब इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठी है।
क्या है पूरा विवाद? गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की मुख्य उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा तकनीकी खामियों का हवाला देकर निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद से ही कांग्रेस इसे सोची-समझी साजिश बता रही है, जबकि पूर्व कांग्रेस विधायक पुरुषोत्तम दांगी के एक फेसबुक पोस्ट ने इसे पार्टी की अंदरूनी ‘फिक्सिंग या चूक’ बताकर पहले ही हड़कंप मचा रखा है। अब यह लड़ाई सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है।