भोपाल में देश का सबसे कड़ा कचरा कानून लागू: 100 से ज्यादा मेहमान बुलाए तो नगर निगम से लेनी होगी अनुमति, 4 डस्टबिन नहीं रखे तो 150% जुर्माना
भोपाल में देश का सबसे कड़ा कचरा कानून लागू: 100 से ज्यादा मेहमान बुलाए तो नगर निगम से लेनी होगी अनुमति, 4 डस्टबिन नहीं रखे तो 150% जुर्माना
भोपाल में देश का सबसे कड़ा कचरा कानून लागू: 100 से ज्यादा मेहमान बुलाए तो नगर निगम से लेनी होगी अनुमति, 4 डस्टबिन नहीं रखे तो 150% जुर्माना
भोपाल: राजधानी भोपाल को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में नगर निगम परिषद ने अब तक का सबसे ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। शहर में केंद्र सरकार के ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026’ को पूरी तरह लागू करने की मंजूरी दे दी गई है। इस नए कानून के तहत अब भोपाल के हर नागरिक और संस्थान के लिए कचरा प्रबंधन (Waste Management) के नियम पूरी तरह बदल जाएंगे। लापरवाही बरतने या नियम तोड़ने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना वसूला जाएगा।
1. घरेलू आयोजनों के लिए अब ‘कचरा परमिशन’ जरूरी
नए नियमों के मुताबिक, यदि आप अपने घर, मैरिज गार्डन या किसी भी संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और उसमें 100 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, तो आपको:
कार्यक्रम शुरू होने से 3 दिन पहले नगर निगम से बकायदा लिखित अनुमति लेनी होगी।
कार्यक्रम में होने वाले कचरे के प्रबंधन की जिम्मेदारी आयोजक की होगी।
बिना अनुमति कार्यक्रम करने या 100 किलो से अधिक मिक्स कचरा फेंकने पर भारी-भरकम जुर्माना देना होगा।
2. ‘4 डस्टबिन का गणित’: अब 4 हिस्सों में बंटेगा कचरा
भोपाल के हर घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को अब अपने परिसर में चार अलग-अलग डस्टबिन रखने होंगे और कचरे को इन चार श्रेणियों में बांटकर ही सफाई कर्मचारियों को देना होगा:भोपाल में देश का सबसे कड़ा कचरा कानून लागू: 100 से ज्यादा मेहमान बुलाए तो नगर निगम से लेनी होगी अनुमति, 4 डस्टबिन नहीं रखे तो 150% जुर्माना
डस्टबिन श्रेणी
शामिल होने वाला कचरा
1. गीला कचरा
रसोई का बचा भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की पत्तियां।
2. सूखा कचरा
रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा
डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट
पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
3. ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ के लिए तय हुए कड़े मानदंड
शहर के करीब 2,000 बड़े परिसरों को ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (ज्यादा कचरा पैदा करने वाले) की श्रेणी में रखा गया है। इनके लिए निम्नलिखित सीमाएं तय की गई हैं, जिनका उल्लंघन करने पर सीधी कार्रवाई होगी:
आवासीय भवन: जिनका कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है।
होटल, रेस्टोरेंट या बाजार: जिनका कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्गमीटर या उससे अधिक है।
पानी की खपत: जहां प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी इस्तेमाल होता है।
कचरा उत्पादन: जहां रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता है।
कमिश्नर का सख्त रुख: भोपाल नगर निगम की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में सड़क पर उड़ती धूल देखकर भड़कीं निगम कमिश्नर ने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर तत्काल 50 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया था।
परिषद की बैठक में तीखी बहस
इस नए कानून को पास कराने के दौरान नगर निगम परिषद की बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने शहर की मौजूदा सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया। वहीं दूसरी ओर, महापौर ने इस कानून का बचाव करते हुए दावा किया कि डिजिटल ट्रैकिंग और इन कड़े नियमों के लागू होने से भोपाल की सफाई व्यवस्था एक नए ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचेगी।