मध्यप्रदेश

पार्षद ही चुनेंगे महापौर, अध्‍यक्ष : केबिनेट में कल हो सकता है फैसला

भोपाल। महापौर अध्यक्ष चुनाव नहीं भोपाल। प्रदेश में पार्षद ही महापौर और अध्यक्ष चुनेंगे। यह तय हो गया है। निकायों की मौजूदा प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में बदलाव के लिए राज्य सरकार जल्द अध्यादेश लाएगी। छह महीने के भीतर विधानसभा से इसे पास कराया जाएगा। मु य सचिव एसआर मोहंती की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिवों की कमेटी मंजूरी दे चुकी है। अब बुधवार को कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगाई जाएगी। दरअसल, 20 साल पहले तक महापौर, अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होता था। जनता उनका चुनाव नहीं करती थी। पार्षदों को यह अधिकार था। तत्कालीन मु यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह व्यवस्था खत्म कर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव शुरू कराए थे। यह अब तक जारी है। कांग्रेस की ही सरकार इसे बदलने जा रही है। इसके पीछे पार्टी का मकसद यह है कि ज्यादातर निकायों में कांग्रेस के मुखिया काबिज हो सकें। चुनाव आगे बढ़ाने में पेंच प्रदेश के करीब 325 नगरीय निकायों की मौजूदा परिषद का कार्यकाल अगले साल जनवरी-फरवरी में खत्म हो रहा है। सरकार निकाय चुनाव टालने की कवायद में लगी है। लेकिन कोर्ट यह साफ कर चुकी है कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद निकाय चुनाव कराने ही होंगे, इसे टाला नहीं जा सकता। यह आदेश निकायों के चुनाव आगे बढ़ाने में रोड़ा बन सकता है। ऐसे में अब राज्य सरकार इस जुगत में लगी है कि कैसे दो-तीन महीने तक चुनाव टाले जाएं। इसके तहत परिसीमन की प्रक्रिया के कार्यक्रम में बदलाव किया जा चुका है। यह अगले साल जनवरी तक चलेगी। बताया जा रहा है मतदाता सूची में संशोधन व सुधार कार्य के नाम पर एक-दो महीने निकाले जा सकते हैं।

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