दान तो कर दो, लेकिन कोरोना के चलते अभी नहीं ली जाएगी देह
जबलपुर, देश व दुनिया में देहदान करने से बड़ा कोई दूसरा महान कार्य नहीं है, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के चलते देह का दान करना अब सपना बनकर रह गया है।
भारत सरकार द्वारा जारी नई गाइड लाइन के तहत अब उन्हीं लोगों की देह दान में ली जाएगी, जिसमें मृत्यु के 15 दिन पहले कोरोना से संबंधित कोई भी लक्षण न रहे हों। इतना ही नहीं ऐसे शव के थ्रोट स्वाव की जांच रिपोर्ट भी कोरोना निगेटिव होना चाहिए।
यानी शासन की नई गाइडलाइन ने देह दान करने पर लगभग प्रतिबंध लगा दिया है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ डॉक्टर बताते हैं कि देह दान लेने से पहले जरूरी होता है कि उस शव में किसी प्रकार की चोट नहीं हो।
उक्त शव कोई बीमारी से ग्रसित नहीं हो। सर्दी के मौसम में देह का दान करने को तैयार व्यक्ति की सामान्य मौत होने पर भी कोई डॉक्टर कैसे मेडिकल सर्टिफिकेट ऑफ काज ऑफ डेथ (एमसीसीडी) देगा कि मरने वाला व्यक्ति 15 दिन पहले सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित नहीं था। उक्त दशा में किसी परिवार या व्यक्ति की इच्छा होने के बाद भी देह का दान नहीं लिया जा सकता।
मानव देह का यह उपयोग:
मेडिकल के शरीर रचना विभाग में मृत देह को कैमिकल प्रोसेसिंग करके सुरक्षित किया जाता है। बाद में मानव देह प्रशिक्षु डॉक्टरों के अध्ययन व रिसर्च के उपयोग में आती है।
कोरोना को रोकना कारण
डॉक्टरों की मानें तो देह का दान लेने पर प्रतिबंध का कारण देश में कोरोना फैलने से रोकना है। लोगों की मौत दो या अधिक स्थितियों के संयुक्त प्रभाव से होती है। यदि किसी मृत देह में किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण रहे और उसे सुरक्षित करके प्रशिक्षु डॉक्टरों के अध्ययन व रिसर्च के उपयोग में लिया गया, तो भविष्य में वह किसी तीसरी स्थिति का कारण होगी।
देह की कमी से बढ़ेगी समस्या
शासन ने गाइडलाइन जारी की है कि मेडिकल के शरीर रचना विभाग में 10 प्रशिक्षु डॉक्टरों पर एक मृत देह रिसर्च करने होना चाहिए। वर्तमान में यहां 180 प्रशिक्षु डॉक्टर हैं, जो कि वर्ष-2021 में बढ़कर 250 हो जाएंगे। तब प्रशिक्षु डॉक्टरों को मृत देह की कमी की समस्या से जूझना पड़ेगा।
डॉ. एन एल अग्रवाल विभागाध्यक्ष,शरीर रचना विभाग, मेडिकल कॉलेज ने बताया कि
शासन की गाइड लाइन के अनुसार ही देह का दान लिया जाएगा। कोरोना संकट के चलते देह दान लेने पर लगभग प्रतिबंध लग गया है।