एमपी बोर्ड की महा-लापरवाही: 12वीं की छात्रा को 71 की जगह दिए सिर्फ 11 नंबर, सदमे में अस्पताल पहुँची बेटी; री-टोटलिंग में खुला राज

एमपी बोर्ड की महा-लापरवाही: 12वीं की छात्रा को 71 की जगह दिए सिर्फ 11 नंबर, सदमे में अस्पताल पहुँची बेटी; री-टोटलिंग में खुला राज

एमपी बोर्ड की महा-लापरवाही: 12वीं की छात्रा को 71 की जगह दिए सिर्फ 11 नंबर, सदमे में अस्पताल पहुँची बेटी; री-टोटलिंग में खुला राज

ग्वालियर: मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) की एक बेहद शर्मनाक और बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्वालियर में 12वीं कक्षा की एक मेधावी छात्रा को अंग्रेजी के पेपर में महज 11 नंबर देकर फेल कर दिया गया। इस गलत रिजल्ट को देखकर छात्रा इस कदर मानसिक सदमे में आ गई कि उसने खाना-पीना छोड़ दिया, खुद को कमरे में बंद कर लिया और अंततः उसकी हालत इतनी बिगड़ी कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

बाद में जब परिवार के संघर्ष और री-टोटलिंग (Re-totalling) के बाद सच सामने आया, तो सबके होश उड़ गए। छात्रा के असल में 11 नहीं, बल्कि 71 नंबर आए थे! बोर्ड की इस कबाड़ व्यवस्था के कारण उसके पूरे 60 नंबर दबा दिए गए थे।

15 अप्रैल को आया था रिजल्ट, टूट गया था भरोसा

यह पूरा मामला ग्वालियर के जनकगंज क्षेत्र के गोल पहाड़िया का है। यहाँ रहने वाली अनामिका रावत ने पूरे आत्मविश्वास के साथ 12वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी। अनामिका हमेशा से पढ़ाई में अव्वल रही थी, इसलिए परिवार और शिक्षकों को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन 15 अप्रैल को जब बोर्ड का परिणाम घोषित हुआ, तो अंग्रेजी विषय के आगे मात्र 11 अंक देखकर अनामिका के पैरों तले जमीन खिसक गई। पढ़ाई में हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने वाली अनामिका इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाई।

29 मई को हुआ न्याय, पर मिला गहरा मानसिक जख्म

अनामिका और उसके परिवार को अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी:

मुख्यमंत्री से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

इस पूरी घटना ने अनामिका और उसके परिवार को भयंकर मानसिक प्रताड़ना से गुजारा है। अनामिका का कहना है कि बोर्ड की एक लापरवाही ने उसकी जिंदगी और करियर को दांव पर लगा दिया था। अब पीड़ित छात्रा और उसके परिजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से गुहार लगाई है कि इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों की वजह से यह गलती हुई है, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।एमपी बोर्ड की महा-लापरवाही: 12वीं की छात्रा को 71 की जगह दिए सिर्फ 11 नंबर, सदमे में अस्पताल पहुँची बेटी; री-टोटलिंग में खुला राज

यह घटना एमपी बोर्ड के मूल्यांकन (Evaluation) और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ी करती है।

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