जिस पर निगरानी का जिम्मा, वही कर रहा जांच- इंदौर में शराब की ओवररेटिंग पर 93 लाख का जुर्माना, फिर भी शिकायतें बरकरार

'निगरानी करने वाले ही कर रहे जांच' इंदौर में शराब दुकानों पर MRP से अधिक वसूली का खेल, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें भी ठंडे बस्ते में

जिस पर निगरानी का जिम्मा, वही कर रहा जांच- इंदौर में शराब की ओवररेटिंग पर 93 लाख का जुर्माना, फिर भी शिकायतें बरकरार

इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शराब दुकानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक दाम वसूलने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ उपभोक्ता लगातार ठगे जाने की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं, तो दूसरी तरफ आबकारी विभाग (Excise Department) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की जांच का जिम्मा उन्हीं आबकारी उपनिरीक्षकों को सौंपा जा रहा है, जिनकी देखरेख में इन दुकानों का संचालन होता है।

 हितों का टकराव: शिकायतें गलत बताकर फाइल बंद करने की कोशिश

नियमों के मुताबिक, शराब की बिक्री न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) से कम और MRP से अधिक नहीं की जा सकती। इसके बावजूद इंदौर शहर और देपालपुर, सांवेर जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में खुलेआम तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच अधिकारी अपने ही क्षेत्र की दुकानों की कमियां छिपाने के लिए शिकायतों को खारिज कर देते हैं:

विभाग का दावा: 93 लाख का जुर्माना लगाया

मामले में विवाद बढ़ने के बाद आबकारी विभाग ने अपना पक्ष रखा है। सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी के अनुसार:

“एमआरपी से अधिक दाम पर शराब बिक्री के मामलों में विभाग सख्त कार्रवाई कर रहा है। अब तक 93 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, जिसमें से 86 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। शिकायत मिलने पर अलग-अलग स्तरों पर दुकानों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है।”

हालांकि, कार्रवाई के आंकड़ों के बावजूद स्थानीय नागरिक और पीड़ित उपभोक्ता जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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