नई दिल्ली। भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित कर सकते हैं। यह अपने आप में एक चौंकाने वाली खबर है क्योंकि मुखर्जी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन खाटी कांग्रेसी के रूप में गुजारा और आरएसएस उनकी विचारधारा से बिल्कुल अलग है।
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के इस कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में संघ से जुड़े विचारक प्रोफेसर राकेश सिन्हा ने मीडिया को जानकारी दी।
आपको बता दें कि यदि प्रणब मुखर्जी इस कार्यक्रम में भाग लेते हैं, तो किसी कांग्रेस में रहे बड़े नेता के लिए ये पहला मौका होगा जब वो संघ के किसी आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा लेगा। सांगठनिक स्तर पर कभी भी दोनों में कोई तालमेल नहीं हुआ। केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में प्रणब का पहला कार्यकाल 1982-84 तक रहा। इसके अलावा कांग्रेस की सरकार के दौर में उन्होंने कई पदों को संभाला है।
फिलहाल जो रिपोर्ट आ रही है, उसके मुताबिक प्रणब मुखर्जी को आरएसएस ने 7 जून को अंतिम वर्ष के स्वयंसेवकों की विदाई सम्मान समारोह के लिए पूर्व राष्ट्रपति को आमंत्रित किया है। इस दौरान कार्यक्रम में देशभर से 45 साल से कम उम्र के करीब 800 स्वयंसेवक मौजूद रहेंगे। आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में हर साल ऐसा कार्यक्रम होता रहा है। इससे पहले इस कार्यक्रम का नाम ऑफिसर्स ट्रेनिंग था।
मगर, अब इसका नाम बदलकर संघ शिक्षा वर्ग कर दिया गया है। शिक्षा ग्रहण करने के बाद आरएसएस के स्वयंसेवक पूर्णकालिक प्रचारक बन सकते हैं। इसके बाद ये प्रचारक आजीवन देश में संघ की विचारधारा के साथ काम करते हैं।
बता दें कि जब प्रणब मुखर्जी रायसीना हिल्स में रहते थे, तब आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत एक बार उनसे मिलने पहुंचे थे। नागपुर के आरएसएस कार्यकर्ताओं ने कहा कि इसकी घोषणा उचित समय पर की जाएगी। हालांकि, उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि पूर्व राष्ट्रपति को इसके लिए न्योता भेजा गया है।
रक्षा मंत्री दो दिन पहले नागपुर के मुख्यालय में पहुंची थीं। यहां पर उन्होंने तीसरी साल के ट्रेनी स्वयंसेवकों को संबोधित किया था और आरएसएस के जनरल सेक्रेटरी भैय्या जी जोशी से मुलाकात की। बताते चलें कि 82 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी कांग्रेस की बड़ी शख्सियत रहे हैं। उनका जुड़ाव कांग्रेस के साथ सन् 1969 से रहा है। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें राज्यसभा में भेजने में मदद की थी और जल्द ही वह इंदिरा गांधी के विश्वास पात्रों की सूची में आ गए।
इंदिरा की हत्या के बाद प्रणब अलग-थलग पड़ गए। एक वक्त तो उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी माना जाने लगा था। 1986 में उन्होंने राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस पार्टी बनाई, लेकिन फिर वह कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी का विलय हो गया। 2012 तक वह कांग्रेस में वह संकटमोचन का काम करते रहे और 2012 से 2017 तक देश के राष्ट्रपति भी रहे।
