जबलपुर में नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच में लापरवाही पर NGT सख्त: कलेक्टर और नगर निगम को दिए नए अधिकारी तैनात करने के निर्देश
NGT का जबलपुर प्रशासन पर कड़ा रुख: नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन पर खिंचाई
जबलपुर में नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच में लापरवाही पर NGT सख्त: कलेक्टर और नगर निगम को दिए नए अधिकारी तैनात करने के निर्देश
जबलपुर / भोपाल: जबलपुर शहर की नालियों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच के लिए गठित समिति में मनोनीत अधिकारियों की घोर लापरवाही पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा संज्ञान लिया है। स्थल निरीक्षण न करने और रिपोर्ट प्रस्तुत न करने वाले अफसरों के रवैये को गंभीरता से लेते हुए ट्रिब्यूनल ने जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों के स्थान पर तत्काल अन्य सक्षम अधिकारियों को मनोनीत किया जाए।
इसके साथ ही एनजीटी ने निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्रों और फोन कॉल को लगातार नजरअंदाज किया, उनसे जवाब तलब कर उनके खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच का आदेश
यह आदेश एनजीटी की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति एस.के. सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने डॉ. पीजी नाजपांडे व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पक्ष: सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पीठ को अवगत कराया गया कि समिति के सदस्यों को निरीक्षण और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कई बार पत्र भेजे गए। इसके बावजूद अधिकारियों ने न तो कोई जवाब दिया, न स्थल निरीक्षण पर पहुंचे और बाद में फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया।
30 दिनों के भीतर रिपोर्ट का अल्टीमेटम: एनजीटी ने नए मनोनीत सक्षम अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय बनाकर संबंधित स्थलों का निरीक्षण करने और 30 दिनों के भीतर संयुक्त रिपोर्ट प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
80% पेयजल पाइपलाइनें नालियों के अंदर, नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरा
याचिकाकर्ताओं (डॉ. पी.जी. नाजपांडे व रजत भार्गव) की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने अदालत के समक्ष शहर की गंभीर स्थिति रखी:
पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें: जबलपुर में करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइनें नालियों से होकर गुजर रही हैं। इनमें से कई पाइपलाइनें 40 से 50 साल पुरानी और कई स्थानों से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं।
दूषित पानी का खतरा: नालियों के अंदर पाइपलाइनें टूटी होने से नालियों का गंदा और जहरीला पानी पीने के पानी में मिल रहा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अगली सुनवाई: याचिका में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने के लिए ठोस कार्ययोजना न होने का मुद्दा भी उठाया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को तय की गई है। जबलपुर में नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच में लापरवाही पर NGT सख्त: कलेक्टर और नगर निगम को दिए नए अधिकारी तैनात करने के निर्देश