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MPPSC 2023 Result: आखिरी कोशिश में सिद्धार्थ की किस्मत बदली, असफल होते तो चलाते किराने की दुकान- अब बने डिप्टी कलेक्टर

MPPSC 2023 Result: आखिरी कोशिश में सिद्धार्थ की किस्मत बदली, असफल होते तो चलाते किराने की दुकान- अब बने डिप्टी कलेक्टर

MPPSC 2023 Result: आखिरी कोशिश में सिद्धार्थ की किस्मत बदली, असफल होते तो चलाते किराने की दुकान- अब बने डिप्टी कलेक्टर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने शनिवार रात राज्य सेवा परीक्षा 2023 का फाइनल परिणाम घोषित किया, जिसमें रतलाम जिले के ग्राम रावटी निवासी सिद्धार्थ मेहता (लक्की) का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ है।

MPPSC 2023 Result: आखिरी कोशिश में सिद्धार्थ की किस्मत बदली, असफल होते तो चलाते किराने की दुकान- अब बने डिप्टी कलेक्टर

परिणाम घोषित होते ही सिद्धार्थ के घर और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। स्वजन और ग्रामीणों ने मिठाई खिलाकर, पुष्पहार पहनाकर तथा आतिशबाजी कर उनका स्वागत किया।

28 वर्षीय सिद्धार्थ मेहता ने बताया कि बड़े भाई श्रेयांश के प्रोत्साहन के बाद से प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते थे। वे पहले पांच बार एमपीपीएससी परीक्षा दे चुके हैं। वर्ष 2019 में वे इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन चयन नहीं हो सका था। सिद्धार्थ ने बताया कि इस बार उन्हें पूरी उम्मीद थी कि सफलता मिलेगी, और परिणाम ने उनके सपने को साकार कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी का पद समाज और देश के विकास में अहम भूमिका निभाता है। जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।

स्व अध्ययन से पाई आखिरी प्रयत्न में सफलता

सिद्धार्थ ने आठवीं तक की पढ़ाई रावटी के निजी स्कूल से की। इसके बाद दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई रतलाम के निजी स्कूल से पूरी की। वर्ष 2014 में उन्होंने कॉमर्स विषय से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद साइंस एंड आर्ट्स कॉलेज से प्राइवेट माध्यम से बीकॉम की डिग्री हासिल की। स्नातक के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक उन्होंने इंदौर के एक निजी कोचिंग संस्थान से एमपीपीएससी की तैयारी की। कोरोना काल के दौरान वे रतलाम लौट आए और स्व-अध्ययन के माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी।

किराने की दुकान संभालने का मन

सिद्धार्थ बताते हैं कि कोचिंग के दौरान मैंने अपने नोट्स बनाए और आगे की तैयारी उन्हीं से की। परिवार ही मेरा सबसे बड़ा मोटिवेशन रहा। अगर इस बार भी सफलता नहीं मिलती, तो पिता और भाई के साथ किराने की दुकान संभालने का मन बना लिया था।

 

 

 

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