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MP की इस सीट पर चार दशक के सियासी करियर में पहली बार सगे भाई आमने-सामने, कोई भी जीते. होगा एक ही परिवार का कब्जा

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Election Sharma Bhai vs Sharma Bhai: शर्मा भाई Vs शर्मा भाई। MP की इस सीट पर चार दशक के सियासी करियर में पहली बार सगे भाई आमने-सामने हैै। कोई भी जीते.. होगा एक ही परिवार का कब्जामध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही राज्य की होशंगाबाद सीट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है. होशंगाबाद को भाजपा का गढ़ माना जाता है. यहां का रसूखदार शर्मा परिवार 33 साल से भाजपा की जीत को बरकरार रखा है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए चुनाव लड़ेगा परि‍वार VS परि‍वार

लेकिन इस चुनाव में शर्मा परिवार, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए चुनाव लड़ेगा. इसका मतलब यह है कि वरिष्‍ठ राजनेता सीतासरन शर्मा और गिरिजा शंकर शर्मा इस बार एक दूसरे के खिलाफ चुनावी लड़ाई लड़ेंगे. चार दशक के सियासी करियर में पहली बार दोनों सगे भाई आमने-सामने हैं।

भाजपा ने जैसे ही अपनी पांचवीं सूची जारी की सियासी गलियारों में शर्मा परिवार की चर्चा होने लगी. भाजपा ने मौजूदा विधायक और पूर्व राज्य विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा को ही होशंगाबाद से अपना उम्मीदवार बनाया है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि सीतासरन के सगे भाई गिरिजा शंकर शर्मा को कांग्रेस पहले ही होशंगाबाद से अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है.

कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी

होशंगाबाद में अब भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी. पलड़ा दोनों ही तरफ भारी है. बता दें कि गिरिजा शंकर शर्मा भाजपा से दो बार विधायक रह चुके हैं. लेकिन इस बार के चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में आने का मन बना लिया. कांग्रेस ने गिरिजाशंकर को पूरी इज्जत दी और उन्हें होशंगाबाद से उम्मीदवार घोषित कर दिया।

इस सीट पर आने वाला नतीज होगा

अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दो सगे भाई प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के उम्मीदवार के तौर पर कैसे चुनाव प्रचार करेंगे और उससे भी ज्यादा इस सीट पर आने वाला नतीज होगा. बता दें कि होशंगाबाद से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दोनों भाइयों की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

बेटों ने 1990 से 2018 के बीच लगातार सात बार होशंगाबाद विधानसभा सीट (पूर्व में इटारसी सीट) जीती थी

राजनीतिक धुरंधरों की मानें तो भाजपा ने सीतासरन शर्मा को इस वजह से मैदान में उतारा है क्योंकि उसे डर है कि होशंगाबाद सीट उसके हाथ से जा सकती है. नर्मदापुरम जिले के शक्तिशाली ब्राह्मण शर्मा परिवार के दो बेटों ने 1990 से 2018 के बीच लगातार सात बार होशंगाबाद विधानसभा सीट (पूर्व में इटारसी सीट) जीती थी, जिससे यह 33 वर्षों तक भगवा पार्टी का गढ़ बना रहा.

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