मुसीबत में दीदी को धोखा नहीं दूंगा, बागी लिस्ट पर शत्रुघ्न सिन्हा का नाम; लेकिन राज्यसभा से तीसरे इस्तीफे ने उड़ाई ममता की नींद – yashbharat.com

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मुसीबत में दीदी को धोखा नहीं दूंगा, बागी लिस्ट पर शत्रुघ्न सिन्हा का नाम; लेकिन राज्यसभा से तीसरे इस्तीफे ने उड़ाई ममता की नींद – yashbharat.com

कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे अभूतपूर्व सियासी घमासान और 20 लोकसभा सांसदों की बगावत की खबरों के बीच एक बहुत बड़ा उलटफेर हो गया है। कयासों के बाजार को पूरी तरह शांत करते हुए आसनसोल से टीएमसी सांसद और बॉलीवुड के ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) ने खुद सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ दी है।

शत्रुघ्न सिन्हा ने बगावत की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए ममता बनर्जी के प्रति अपनी अटूट वफादारी का ऐलान कर दिया है। हालांकि, दूसरी तरफ राज्यसभा से एक और बड़े इस्तीफे ने टीएमसी आलाकमान की नींद उड़ा दी है।

1. “दुख की घड़ी में ममता दीदी के साथ खड़ा हूँ”- शत्रुघ्न सिन्हा

बागी सांसदों की लिस्ट में अपना नाम आने से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा:

2. क्या है 20 सांसदों की बगावत का पूरा सच? लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

दरअसल, बंगाल की राजनीति में भूचाल तब आया जब यह पुख्ता खबर सामने आई कि पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, काकोली घोष दस्तीदार और सायनी घोष समेत टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक गोपनीय पत्र लिखा है। इस पत्र में इन सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में शामिल होने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है।

इन 20 सांसदों के नामों की चर्चा से थर्राई बंगाल की सियासत:

मीडिया के गलियारों में तैर रही बागी सांसदों की इस हाई-प्रोफाइल लिस्ट में यूसुफ पठान, अबू ताहिर खान, पार्थ भौमिक, काकोली घोष दस्तीदार, बापी हलदर, सायोनी घोष, रचना बनर्जी, असित मल, के रहमान, शर्मिला सरकार, मिताली बाग, कालीपद सोरेन, जून मालिया, माला रॉय, देव अधिकारी, शताब्दी रॉय, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया और अरूप चक्रवर्ती जैसे दिग्गज चेहरों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

3. राज्यसभा में टीएमसी का ‘विकेट पतन’: आज तीसरा बड़ा इस्तीफा!

एक तरफ जहाँ लोकसभा सांसदों को मनाने और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आ रही है।

बंगाल में पार्टी को मिली करारी शिकस्त के बाद नेताओं का ममता बनर्जी से मोहभंग होना और एक के बाद एक राज्यसभा से आ रहे ये इस्तीफे साफ इशारा कर रहे हैं कि टीएमसी इस वक्त अपने सबसे बड़े राजनीतिक अस्तित्व के संकट से गुजर रही है।

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