1. वस्त्रों से आगे बढ़कर होम डेकोर तक विस्तार
फरवरी 2015 में लॉन्च हुए ‘कबीरा’ ब्रांड ने अपनी रेंज में अभूतपूर्व विस्तार किया है। अब ग्राहकों को केवल कुर्ते ही नहीं, बल्कि:
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परिधान: कॉटन और मुलबरी सिल्क साड़ियाँ, स्टाइलिश जैकेट, कुर्तियां, सूट और शर्ट्स।
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घरेलू साज-सज्जा: बेडशीट, तकिया कवर, दरी, तौलिया और ऊनी कंबल।
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विशेष मटेरियल: मलमल, सिल्क और कॉटन का रनिंग ड्रेस मटेरियल।
2. पर्यावरण-मित्र और ‘ऑल सीजन’ फैब्रिक
राज्यमंत्री ने खादी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एक “नेचुरल एयर-कंडीशन्ड” वस्त्र है। यह गर्मियों में शीतलता और सर्दियों में गर्माहट प्रदान करता है। जैविक और पर्यावरण-मित्र होने के कारण जागरूक युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
3. रिश्तों की मिठास और खादी का जुड़ाव
श्री जायसवाल ने खादी को भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर खादी की राखियों और उपहारों की मांग यह दर्शाती है कि समाज अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। खादी का बंधन केवल धागों का नहीं, बल्कि दिलों और रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बन गया है।
4. ‘लोकल टू ग्लोबल’ से आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश
“कबीरा” और “विंध्या वैली” जैसे ब्रांड्स के माध्यम से प्रदेश के हजारों ग्रामीण कारीगरों को सीधा रोजगार मिल रहा है। यह मुख्यमंत्री के ‘आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश’ के संकल्प को सिद्ध कर रहा है, जहाँ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।

