बीमा कंपनी अदा करे 2 लाख आठ हजार, स्वास्थ्य बीमा कम्पनी को कड़ी फटकार

 

बीमा कंपनी अदा करे 2 लाख आठ हजार, स्वास्थ्य बीमा कम्पनी को कड़ी फटका

कटनी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने सी.सी. क्रमांक 82/2023, निर्मला जायसवाल विरुद्ध मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (न्यू नीवा बूपा) में महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए बीमा कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में राहत प्रदान करने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार  निर्मला जायसवाल, निवासी हीरागंज, कटनी ने बीमा कंपनी से Health Companion Variant-2 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी प्राप्त की थी। पॉलिसी की अवधि 22 जुलाई 2020 से 21 जुलाई 2021 तक थी तथा बीमाधन 5,00,000 रुपये था।

बीमा अवधि के दौरान आवेदिका को कोरोना संक्रमण होने के कारण 09 अप्रैल 2021 से 15 अप्रैल 2021 तक चिरायु मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, भोपाल में उपचार हेतु भर्ती रहना पड़ा। उपचार पर कुल 1,96,199 रुपये व्यय हुए। परिवादिनी द्वारा उक्त राशि का बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए दावा निरस्त कर दिया।

बीमा कंपनी का मुख्य तर्क था कि अस्पताल में भर्ती होना “Medically Necessary Hospitalization” की श्रेणी में नहीं आता और पॉलिसी की शर्त 6.15 के अनुसार दावा स्वीकार्य नहीं है। इसके विपरीत आवेदिका की ओर से उपचार संबंधी दस्तावेज, ट्रीटमेंट समरी तथा चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए गए। आयोग ने चिकित्सकीय दस्तावेजों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद बीमा कंपनी द्वारा दावा निरस्त किए जाने को उचित नहीं माना।

आयोग ने अपने निर्णय में “The New India Insurance Company vs. Shamim Azhar Khan”, F.A. No. 1239/2007, Order dated 06.04.2010 के निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें बीमा कंपनी के अधिकारियों को मेडिकल इमरजेंसी के संबंध में विशेषज्ञ डॉक्टर का स्थान लेने वाला विशेषज्ञ नहीं माना गया था।

आयोग का महत्वपूर्ण आदेश

जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निर्देशित किया कि—

इस प्रकरण में आवेदिका की ओर से एडवोकेट मौसूफ बिट्टू एवं सत्येंद्र शुक्ला द्वारा प्रभावी पैरवी की गई।

अधिवक्ताओं ने बताया कि उपभोक्ता द्वारा विधिवत प्रीमियम अदा कर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेने के बावजूद वास्तविक उपचार व्यय का दावा केवल पॉलिसी की शर्तों की व्याख्या के आधार पर अस्वीकार किया गया था। आयोग द्वारा उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के समुचित परीक्षण के बाद उपभोक्ता के पक्ष में राहत दिया जाना उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय है।

 

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