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पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत; 14 जुलाई तक टली सुनवाई, दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज

धोखाधड़ी केस में दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी, दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला

धोखाधड़ी केस में दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी, दिल्ली एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला

पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत; 14 जुलाई तक टली सुनवाई, दतिया में उपचुनाव की सुगबुगाहट तेज

दतिया/नई दिल्ली: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) धोखाधड़ी मामले में तीन साल की जेल की सजा पाने के बाद अपनी विधानसभा सदस्यता (विधायकी) गंवा चुके मध्य प्रदेश के दतिया से पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को देश की राजधानी से बड़ा झटका लगा है। मंगलवार (26 मई 2026) को दिल्ली हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान भी उन्हें अदालत से कोई फौरी राहत नहीं मिल सकी। माननीय न्यायालय ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 तक के लिए टाल दी है।

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लगातार तीसरी बार कोर्ट की सुनवाई आगे बढ़ने के कारण जहाँ एक तरफ राजेंद्र भारती के समर्थकों और कांग्रेस खेमे में भारी निराशा है, वहीं दूसरी तरफ दतिया विधानसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव (By-Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं।

शीघ्र सुनवाई की ‘विशेष गुहार’ भी नहीं आई काम

जानकारी के अनुसार, दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट द्वारा सुनाई गई 3 साल की सजा के खिलाफ राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

क्या है पूरा मामला और क्यों गई विधायकी?

यह पूरा विवाद एक पुराने एफडी (FD) धोखाधड़ी मामले से जुड़ा हुआ है। दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने राजेंद्र भारती को इस जालसाजी का दोषी पाते हुए 3 साल के कारावास की सजा सुनाई थी।

नियम क्या कहता है? भारतीय कानून (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम) के तहत, यदि किसी भी मौजूदा सांसद या विधायक को कोर्ट द्वारा 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदन की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है। इसी नियम के तहत राजेंद्र भारती को अपनी विधायकी से हाथ धोना पड़ा था।

अब सबकी नजरें 14 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि दतिया की सियासत ऊँट किस करवट बैठता है।

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