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FASTag नहीं लगवाया तो हो जाएं सावधान, अब करना पड़ेगा पुलिस के सवालों का सामना

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FASTag: फास्टैग को अनिवार्य करने के बाद केंद्र सरकार ऐसी योजना बनाने जा रही है जहां रास्तों पर टोल बूथ नजर नहीं आएंगे। यह बात खुद केंद्रीय सड़क परिवहन तथा राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में कही।

नितिन गडकरी ने कहा भारत में जल्द टोल बूथों को समाप्त कर दिया जाएगा और एक साल के भीतर पूर्ण जीपीएस आधारित टोल संग्रह को लागू कर दिया जाएगा।

 

साथ ही नितिन गडकरी ने कहा कि अब ऐसे वाहनों के लिए पुलिस जांच का निर्देश दिया गया है जो FASTags का उपयोग कर टोल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। अगर वाहनों में FASTags फिट नहीं हैं तो टोल चोरी और जीएसटी चोरी के केस दर्ज किए जाएंगे।

बता दें, टोल प्लाजा पर शुल्क के इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की सुविधा के तहत 2016 में FASTags की शुरुआत की गई थी।

परिवहन मंत्री बताया कि आज 93 प्रतिशत वाहन FASTag का इस्तेमाल करते हुए टोल का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन 7 प्रतिशत वाहन चालक ऐसे हैं जिन्होंने डबल टोल टैक्स भरा है, फिर भी FASTag लेने से बच रहे हैं।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि एक वर्ष के भीतर देश के सभी टोल बूथ हटा दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि टोल संग्रह जीपीएस के माध्यम से होगा। धनराशि जीपीएस इमेजिंग (वाहनों पर) के आधार पर एकत्र की जाएगी। गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा में यह बात कही गई।

इस साल 16 फरवरी से FASTag पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है और अब इसके बिना वाहनों को देशभर में हर जगह दोगुना टोल शुल्क देना पड़ रहा है। FASTag को अनिवार्य करने के पीछे मकसद यह है कि टोल प्लाजा पर समय खर्च न हो और देरी से यात्रियों को परेशान न होना पड़े। इससे प्रदूषण में भी कमी आएगी। गडकरी ने कहा कि अब नए वाहनों में FasTags लगाकर दिए जा रहे हैं, जबकि पुराने वाहनों में मुफ्त FASTags लगवाए जा रहे हैं।

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