WPI Inflation Shock: आम जनता को महंगाई का तगड़ा झटका-मई में थोक महंगाई उछलकर 9.68% पर पहुंची; ईंधन, बिजली और कच्चे तेल ने बाजार में लगाई आग

WPI Inflation Shock: आम जनता को महंगाई का तगड़ा झटका! मई में थोक महंगाई उछलकर 9.68% पर पहुंची; ईंधन, बिजली और कच्चे तेल ने बाजार में लगाई आग

WPI Inflation Shock: आम जनता को महंगाई का तगड़ा झटका-मई में थोक महंगाई उछलकर 9.68% पर पहुंची; ईंधन, बिजली और कच्चे तेल ने बाजार में लगाई आग

नई दिल्ली: अगर आप यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि बाजार में रोजमर्रा के सामानों की कीमतें जल्द ही कम होंगी और आपको महंगाई से राहत मिलेगी, तो सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने इन उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। देश में थोक बाजार के स्तर पर महंगाई की मार बेहद खतरनाक रफ्तार से बढ़ी है। मई महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर में एक ऐसा तेज उछाल देखा गया है, जिसने सरकार से लेकर आम उपभोक्ता और व्यापारियों तक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार, 15 जून 2026 को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की थोक महंगाई दर ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। थोक बाजार में आई इस भीषण तेजी का सीधा और कड़वा असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार (Retail Market) पर पड़ने वाला है, जिससे आम जनता की जेब और ज्यादा ढीली होना तय है।

अप्रैल के मुकाबले मई में बेकाबू हुई महंगाई

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों की तुलना करें, तो स्थिति काफी परेशान करने वाली नजर आती है:

 ईंधन, बिजली और कच्चे तेल ने लगाई बाजार में आग

इस जबरदस्त उछाल के पीछे सबसे बड़ी और मुख्य वजह ईंधन, बिजली और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकॉर्ड तोड़ तेजी को माना जा रहा है:

  1. ईंधन और बिजली (Fuel & Power): इस सेक्टर में थोक महंगाई अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से सीधे लंबी छलांग लगाते हुए मई में 30.33 प्रतिशत के पार पहुंच गई है।WPI Inflation Shock: आम जनता को महंगाई का तगड़ा झटका-मई में थोक महंगाई उछलकर 9.68% पर पहुंची; ईंधन, बिजली और कच्चे तेल ने बाजार में लगाई आग

  2. कच्चा तेल (Crude Petroleum): कच्चे तेल के मोर्चे पर महंगाई का स्तर मई में 61.51 प्रतिशत के खतरनाक और रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया है, जो कि अप्रैल में 56.31 प्रतिशत था।

पश्चिम एशिया का संकट और ₹7.50 की बढ़ोतरी बनी वजह

थोक महंगाई में इस भारी बढ़ोतरी का सीधा कनेक्शन वैश्विक भू-राजनीति से जुड़ा है। पश्चिम एशिया (मिडिल-ईस्ट) में जारी गंभीर संकट और ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ की प्रभावी नाकेबंदी के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। चूंकि इसी समुद्री रास्ते से भारत का अधिकांश कच्चा तेल आयात होता है, इसलिए वैश्विक दाम बढ़ने की वजह से ही मई के दूसरे हिस्से में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹7.50 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी करनी पड़ी थी, जिसका असर अब पूरे बाजार पर दिख रहा है।

 ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से रसोई का बजट भी बिगड़ा

ईंधन की इस आग ने सीधे तौर पर देश की रसोई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अपनी चपेट में ले लिया है:

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